महाराज बहादुर `बर्क़’

महाराज बहादुर `बर्क़’की रचनाएँ

तेग़े-हिन्दी तेग़े-हिन्दी[1] साफ़ करती सफ़े-दुश्मन [2]तू जिधर चलती है हाथ बाँधे तेरे साये में ज़फ़र [3]चलती है * * तुझ में वोह…

2 months ago