रत्नावली देवी

रत्नावली देवी की रचनाएँ

दोहा / भाग 1 होइ सहज ही हौं कही, लह्यो बोध हिरदेस। हों रतनावली जँचि गई, पिय हिय काँच विसेस।।1।।…

4 weeks ago