राजमणि मांझी ‘मकरम’

राजमणि मांझी ‘मकरम’ की रचनाएँ

केवल अपने लिए मैं स्वार्थी हूँ अपनी बीवी की गाँठ खोलकर लूट लेता हूँ उसकी बची-खुची अस्मिता जबरन उधार माँगता…

4 weeks ago