राजीव भरोल ‘राज़’

राजीव भरोल ‘राज़’की रचनाएँ

मुहब्बत का कभी इज़हार करना ही नहीं आया मुहब्बत का कभी इज़हार करना ही नहीं आया, मेरी कश्ती को दरिया…

2 weeks ago