राजुला शाह

राजुला शाह की रचनाएँ

विस्मृति बूँद की बड़ी-सी परछाईं उस छाया में चिपके तिनके आर-पार लड़खड़ाता भूरा दरवाजा रुक गया सिरे पर भूरे तने…

3 weeks ago