रामदेव भावुक

रामदेव भावुक की रचनाएँ

  जवानी पैंचा नै लेबै लिखलाका मेटाय देवै, अपना लिलार के ठूठ पाखड़ के किरिया, पकबा इनार के बरगबिहीन मजुरबा…

2 months ago