राही फ़िदाई

राही फ़िदाई की रचनाएँ

एहसास-ए-ज़िम्मेदारी बेदार हो रहा है एहसास-ए-ज़िम्मेदारी बेदार हो रहा है हर शख़्स अपने क़द का मीनार हो रहा है आवाज़-ए-हक़…

2 weeks ago