रुद्रदत्त मिश्र

रुद्रदत्त मिश्रकी रचनाएँ

मुर्गा बोला ‘कुकडू़ँ कूँ’ की बाँग लगाता, बड़े सवेरे हमें जगाता। चोटी लाल, पंख रंग वाले, चला अकड़ से चोंच…

2 weeks ago