वाज़दा ख़ान

वाज़दा ख़ान की रचनाएँ

शिकार विषादयुक्त चेहरे चेहरों पर चढ़े मुखौटे टँगे हैं जैसे खूँटी पर एक दो तीन चार... गिनती में शायद वे…

2 months ago