विजेन्द्र

विजेन्द्र की रचनाएँ

एक प्रेम कविता  प्यार को भी देखता हूँइन्ही मासूम रंगों मेंतेज़, सुर्ख़, हल्के गुलाबीन हों, न हों, न होंधूप में…

2 months ago