विपुल कुमार

विपुल कुमार की रचनाएँ

खेल-खिलौने जन्म-दिवस पर मिले खिलौने,मुझको लगते बड़े सलोने।पास हैं मेरे दो मृगछौने,ढम-ढम ढोल बजाते बौने।ठुम्मक-ठुम्मक नाचे बाला,एक सिपाही पकडे़ भाला।धुआँ…

2 months ago