शमशेर बहादुर सिंह

शमशेर बहादुर सिंह की रचनाएँ

निराला के प्रति भूलकर जब राह- जब-जब राह...भटका मैंतुम्हीं झलके, हे महाकवि,सघन तम की आंख बन मेरे लिए,अकल क्रोधित प्रकृति…

3 months ago