शाहीन अब्बास

शाहीन अब्बास की रचनाएँ

अब ऐसे चाक पर कूज़ा-गरी होती नहीं थी अब ऐसे चाक पर कूज़ा-गरी होती नहीं थी कभी होती थी मिट्टी…

2 months ago