शेख़ अली बख़्श ‘बीमार’

शेख़ अली बख़्श ‘बीमार’ की रचनाएँ

बुतो ये शीशा-ए-दिल तोड़ दो ख़ुदा के लिए बुतो ये शीशा-ए-दिल तोड़ दो ख़ुदा के लिए जो संग-ए-दिल हो तो…

2 months ago