शैलेन्द्र शान्त

शैलेन्द्र शान्त की रचनाएँ

कि जैसे हो महाराजे ई ससुरी रोटी-दाल तेल तरकारी चीनी चावल, रोज़ी निकली खोटी भक्ति के आगे दुम दबा कर…

2 months ago