ब्रज भाषा

गदाधर भट्ट की रचनाएँ

सखी, हौं स्याम रंग रँगी  सखी, हौं स्याम रंग रँगी। देखि बिकाइ गई वह मूरति, सूरति माहि पगी॥१॥ संग हुतो…

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गँग की रचनाएँ

फूट गये हीरा की बिकानी कनी हाट हाट फूट गये हीरा की बिकानी कनी हाट हाट, काहू घाट मोल काहू…

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बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ की रचनाएँ

दुर्दशा दत्तापुर श्रीपति कृपा प्रभाव, सुखी बहु दिवस निरन्तर। निरत बिबिध व्यापार, होय गुरु काजनि तत्पर॥१॥ बहु नगरनि धन, जन…

2 months ago