अमीन हज़ीं

अमीन हज़ीं की रचनाएँ

अफ़्साना-ए-हयात को दोहरा रहा हूँ मैं  अफ़्साना-ए-हयात को दोहरा रहा हूँ मैं यूँ अपनी उम्र-ए-रफ़्ता को लौटा रहा हूँ मैं…

3 months ago