ब्रह्मा की रचनाएँ

प्रात समै वृषभानु सुता उठि आपु गई सरितान के खोरन प्रात समै वृषभानु सुता उठि आपु गई सरितान के खोरन…

9 months ago

ब्रह्मदेव शर्मा की रचनाएँ

खुली या बंद हों आँखें दिखाई देता है खुली या बंद हों आँखें दिखाई देता है। उसी का नाद है…

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ब्रह्मजीत गौतम की रचनाएँ

यार क्यों हो गया ख़फ़ा मुझसे यार क्यों हो गया ख़फ़ा मुझसे ऐसी क्या हो गई ख़ता मुझसे ज़ख़्म ये…

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ब्रजेश कृष्ण की रचनाएँ

इन दिनों वह-1 इन दिनों अक्सर देखती है वह पेडों को गुनगुनाते हुए उसके लिए गुब्बारे की तरह हल्की हो…

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ब्रजेन्द्र ‘सागर’की रचनाएँ

कत'आ इससे बढ़कर मलाल शायरी में क्या होगा लिखता हूँ जिसके लिए उसको गुमान ही नहीं समझे मुझे सारा जहाँ…

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ब्रजमोहन की रचनाएँ

फुटपाथ बिछौने हैं अपने नीचे सड़कों के फुटपाथ बिछौने हैं कोई खिलौना मांग न बेटे! हम ही खिलौने हैं कच्चे-पक्के,…

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ब्रज श्रीवास्तव की रचनाएँ

आज की सुबह ताज़ा हवा से बातचीत हो सकी आज रात की रही रंगत देखी सुबह की सड़कों पर नदी…

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ब्रज चन्द्र की रचनाएँ

होत ही प्रात जो घात करै नित होत ही प्रात जो घात करै नित पारै परोसिन सोँ कल गाढ़ी ।…

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बोधिसत्व की रचनाएँ

कुछ भी मारो, बस, आँख मत मारो (मर्यादावादियों के लिए एक नया राष्ट्रगान) गोरक्षक बन कर मारो गोमाँस के नाम…

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बोधा की रचनाएँ

हिलि मिलि जानै तासोँ मिलिकै जनावै हेत हिलि मिलि जानै तासोँ मिलिकै जनावै हेत , हित को न जानै ताको…

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