महेन्द्र भटनागर

महेन्द्र भटनागर की रचनाएँ

वेदना ओढ़े कहाँ जाएँ वेदना ओढ़े कहाँ जाएँ! उठ रहीं लहरें अभोगे दर्द की! कैसे सहज बन मुस्कुराएँ!! रुँधा है…

2 months ago