‘रासिख़’ अज़ीमाबादी

‘रासिख़’ अज़ीमाबादी की रचनाएँ

दिल ज़ुल्फ़-ए-बुताँ में है गिरफ़्तार हमारा दिल ज़ुल्फ़-ए-बुताँ में है गिरफ़्तार हमारा इस दाम से है छूटना दुश्वार हमारा बाज़ार-ए-जहाँ…

2 weeks ago