वंदना गुप्ता

वंदना गुप्ता की रचनाएँ

क्योंकि तख्ता पलट यूँ ही नहीं हुआ करते  अब सिर्फ लिखने के लिए नहीं लिखना चाहती थक चुकी हूँ वो…

10 months ago

वंदना गुप्ता की रचनाएँ

अघायी औरतें मर्दों के शहर की अघायी औरतें जब उतारू हो जाती हैं विद्रोह पर तो कर देती हैं तार-तार…

10 months ago

वंदना गुप्ता की रचनाएँ

देखो आज मुझे मोहब्बत के हरकारे ने आवाज़ दी है  सोचती हूँ कभी कभी तुम जिसे मैंने देखा नहीं और…

10 months ago