शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

शाहिद मिर्ज़ा शाहिद की रचनाएँ

जो ग़ज़लें मंसूब हैं तुमसे उनको फिर दोहराना है जो ग़ज़लें मंसूब हैं तुमसे उनको फिर दोहराना है रूठे हुए…

2 months ago