शाह मुबारक ‘आबरू’

शाह मुबारक ‘आबरू’की रचनाएँ

अफ़सोस है कि हम कूँ दिल-दार भूल जावे  अफ़सोस है कि हम कूँ दिल-दार भूल जावेवो शौक़ वो मोहब्बत वो…

2 months ago