राजस्थानी

मनुज देपावत की रचनाएँ

धोरां आळा देस जाग धोरां आळा देस जाग रे, ऊंठां आळा देस जाग। छाती पर पैणा पड़्या नाग रे, धोरां…

4 days ago

मधु आचार्य ‘आशावादी’ की रचनाएँ

अकाल है मनुष्यों में मनुष्यता का रिस्तों में विश्वास का शब्दों में संवेदना का राज्य में राम का नेता में…

6 days ago

मदन गोपाल लढ़ा की रचनाएँ

कविता से ज़्यादा कौन कहता है मैंने कुछ नहीं लिखा इन दिनों। कविता में शब्द होते हैं प्राण जीवन का…

6 days ago

मंगत बादल की रचनाएँ

रेत री पुकार (कविता) थे कदी सुणी है- रेत री पुकार तिस मरती रेत री पाणी जठै एक सोवणो सुपनो…

2 weeks ago

किशोर कल्पनाकांत की रचनाएँ

पलक झपकता गया कठीने ? औस तणा नैनाकिया मोती, पसरयोडा हा इतरी ताळ! पलक झपकाता गया कठीने, करूँ औस री…

2 months ago

ओम नागर की रचनाएँ

हलौळ  अस्यां तो कस्यां हो सकै छै कै थनै क्है दी अर म्हनै मान ली सांच कै कोई न्हं अब…

2 months ago

हरीश भादानी की रचनाएँ

राजस्थानी कविता संग्रह बाथां में भूगोल रेत रै समंदर रौ पांणी खाथौ चाल रे खाथौ चाल रे कमतरिया देखलै सींवपाछौ…

3 months ago