अज्ञात हिन्दू महिला की रचनाएँ

स्तुति 

इस दुनिया में दो दिन गुजारा है अब;
नहीं यहाँ किसी का इजारा है अब।
तेरे तक अक़्ल को रसाई नहीं;
इसी जापै इंसान हारा है अब।

जो दुनिया में आवें तेरी याद में;
जो दुनिया से जावें तेरी याद में।
न निकलें ज़बाँ से कोई और बात;
हरेक हर्फ़ निकले तेरी याद में।

न भूले से आवे किसी का ख़याल;
जो हो दिल की ख़्वाहिश तेरी याद में।

न हर्गिज़ हो मुझसे कोई फैल-बद;
हो सब काम मेरे तेरी याद में।

अब है दिल की ये आरज़ू ऐ ख़ुदा!!
मेरी जान जावे तेरी याद में।

ख़ुदा से मेरी फ़रियाद

दुनिया में हम दुखी हैं हमारी ख़बर तू ले;
दुःख दर्द से छुटा हमें एक बार खबर ले।

दुनिया में कोई हमदम न हमको पड़ी नज़र;
तेरे सिवा कोई नहीं दिलदार खबर ले।

तुझ बिन कोई नहीं है दुनिया में मददगार;
ऐ जाने जहां हमदम व ग़म ख्वार खबर ले।

अब तेरे दर पे आ पड़े दुनिया छोड़ हम;
तेरे सिवा कोई नहीं दरबार खबर ले।

‘तिरिया चरित्र’ सुनके शोला भड़क उठा
इस बात से हूँ बहुत शर्मसार खबर ले।

इस क़ैद में हम ज़िन्दगी काटेंगी कब तलक़;
रहबर कोई नहीं ऐ रब, तू खबर ले।

मक्र-ओ-फरेब मर्दों ने सताया हमें बहुत;
तू बन के दुश्मनों का खूँखार ख़बर ले।न

हालत है दर्दनाक ज़रा गौर से सुनो;
बरस हो चुके इस हालत में दस हज़ार खबर ले।

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