अनवर ईरज की रचनाएँ

रथ-यात्रा

तुम्हारी
रथ यात्रा के ठीक पीछे ही पीछे
हिन्दुस्तान भी
विनाश-यात्रा पे
निकल पड़ा है
तुम्हारी
यात्रा तो ख़त्म हुई
और तुम
अपने घर लौट आए
लेकिन
उसकी यात्रा
कब ख़त्म होगी
और वो कब
अपने घर लौटेगा
मालूम नहीं
उसके लिए प्रार्थना
तुम भी करना
कि उसकी यात्रा
मंगलमय हो
और वो
सही-सलामत
अपनी यात्रा से
अपने घर
लौट आए

एक बार ही सही

वो
बार-बार
बोल रहा है
और ज़हर उगल रहा है

वो
बार-बार
बोल रहा है
ग़लत और झूठ
बोल रहा है

क्या हम इतने
ग़ैर जानिबदार
सैक्यूलर
और मस्लेहात पसंद हो गए हैं
कि बार-बार नहीं तो कम से कम
हमें एक बार ही सही
सच तो बोलना चाहिए

राम सेवक

यक़ीन जानो
तुम
राम सेवक नहीं थे जब
तो ऐसे नहीं थे
राम सेवा तो नफ़रत
बढ़ाती नहीं
राम सेवा तो हत्या
कराती नहीं
राम सेवा
दरिंदा बनाती नहीं
तेरा
राम सेवक का दावा
बहुत खोखला है

रावण के सैनिक
मुखौटा हटाओ
ज़माने को अपना मकरूह
चेहरा दिखाओ

अमल रद्दे अमल

न्यूटंस लॉ
न कल ग़लत था
न आज है
न ही कल ग़लत साबित हो सकेगा
तुम ठीक कहते हो
कि हर अमल का
एक रद्दे अमल होता है
लेकिन ये भी ग़लत नहीं है
कि हर अमल का
एक जवाज़ भी होता है
दीवार पे गेंद
जितनी तेज़ी से
मारोगे
उतनी ही तेज़ी से
तुम्हारे पास लौट आएगी
तुम सच कहते हो
बिल्कुल सच कि
गुजरात
गोधरा का रद्दे अमल है
गोधरा
किसका रद्दे अमल था?

ग़द्दार 

तुमने बावन साल
ग़द्दार, ग़द्दार
का एक ही नारा बुलंद किया
कि एक झूठ
सच बन जाए
लेकिन
शायद तुम भूल गए
मेरी
ज़र्रे-ज़र्रे से वफ़ादारी
जो तुम्हें, बावन साल
दुनिया के सामने
झुठलाती रही
और तुम इस सदी के
सब से बड़े काज़िब
साबित हुए
निस्फ़ सदी की
ये तेरी कोशिश
झूठ, सच का
लबादा बदल तो सकती थी
लेकिन
तुम्हें कौन समझाए
कि आफ़ाक़ी सच
अपना लबादा
नहीं बदलता

ग़द्दार 

तुमने बावन साल
ग़द्दार, ग़द्दार
का एक ही नारा बुलंद किया
कि एक झूठ
सच बन जाए
लेकिन
शायद तुम भूल गए
मेरी
ज़र्रे-ज़र्रे से वफ़ादारी
जो तुम्हें, बावन साल
दुनिया के सामने
झुठलाती रही
और तुम इस सदी के
सब से बड़े काज़िब
साबित हुए
निस्फ़ सदी की
ये तेरी कोशिश
झूठ, सच का
लबादा बदल तो सकती थी
लेकिन
तुम्हें कौन समझाए
कि आफ़ाक़ी सच
अपना लबादा
नहीं बदलता

आस्था

तुम्हारी
आस्था की बुनियाद
बहुत कमज़ोर है
क्योंकि
तुमने उसकी बुनियाद
उस भूमि पर रखी ही नहीं
जो सचमुच राम की भूमि थी
तुमने
अपने कर्तव्य और आस्था की पाकीज़गी
राम से नहीं जोड़ी
राम से जोड़ते
तो दुनिया एहतराम करती
तुमने अपनी आस्था
एक गंदी सियासत से
जोड़ रखी है
और राम को
अपनी कुर्सी के पाए से
बांध रखा है
तुमने
राम और राम भक्तों को
एक साथ
छला है

किराएदार

ये आलीशान मकान
जिसके हाते में
रंग-बिरंग के फूल खिले हैं
ये कभी हमारा था
और हम इसके मालिक हुआ करते थे
लेकिन
अब हम इसके मालिक नहीं
हिस्सेदार भी नहीं
किराएदार हो गए हैं
पचपन साल नौ महीने सत्ताईस दिन से
हम अपने ही मकान में
किराएदार की हैसियत से
रहते चले आ रहे हैं
मकान का
ये ख़ुद-साख़्ता मालिक
बार-बार हमें
निकाल देने की धमकियाँ दे रहा है

एक दहशतगर्द 

हम देख रहे हैं
और हमारी तरह दुनिया देख रही है
कि दहशतगर्दी और आतंकवाद
के नाम पर
कितनी दहशतगर्दी हुई
अफ़ग़ानिस्तान तबाह किया
इस इल्ज़ाम के साथ कि वो
वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन का
मुजरिम है
सबूत गरचे कुछ भी नहीं
इराक़ तबाह हुआ
इस इल्ज़ाम में कि वो
ख़तरनाक अस्लहों का ज़ख़ीरा इकट्ठा कर रहा है
और दुनिया में दहशतगर्दी का
कारण बनेगा
हक़ीक़त गरचे कुछ भी नहीं
यू.एन.ओ. किस क़दर मजबूर था
दुनिया किस क़दर लाचार थी
उस एक
बस एक
दहशतगर्द के आगे

हिंदू की हिंदुस्तानी

हमसे सवाल करने वालो
कि हम पहले
मुसलमान है या हिंदुस्तानी
अब तुम्हारे
इम्तेहान की घड़ी आ गई है
कि तुम पहले
हिन्दू हो या हिन्दुस्तानी
एक तरफ़
तुम्हारी संसद है
और दूसरी तरफ़
धर्म संसद
तुम्हारा इन्तख़ाब ही
तुम्हारा
जवाब होगा
हमारा इन्तख़ाब
दुनिया जानती है

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