इकराम राजस्थानी की रचनाएँ

तेरे बिन ये पहला-दिन 

तेरे बिन ये पहला-दिन,
सूना-सूना निकला दिन।

सूरज किरनें धूप वही,
फिर भी बदला बदला दिन।

तेरे साये, ढूंढ़ रहा है,
कैसा है ये पगला दिन।

तनहाई के सन्नाटों में,
घूमा झुंझला-झुंझला दिन।

शाम तलक तड़पा यादों में,
फिर मुश्किल से सम्भला दिन।

आपसे जब सामना होने लगा

आपसे जब सामना होने लगा,
ज़िन्दगी में क्या से क्या होने लगा।

चैन मिलता है तड़पने से हमें,
दर्द ही दिल की दवा होने लगा।

ज़िन्दगी की राह मुश्किल हो गई,
हर क़दम पर हादसा होने लगा।

दोस्तों से दोस्ती की बात पर,
फ़ासला दर फ़ासला होने लगा।

जो ग़जल में शेर बनकर के रहा,
काफ़ियों से वो ज़ुदा होने लगा।

जैसे हो तस्वीर इक दीवार पर,
आदमी अब क्या से क्या होने लगा।

ये तुम्हारी याद है या ज़ख्म है,
दर्द पहले से सिवा होने लगा।

ढूँढ़ता है आदमी सदियों से दुनिया में सुकून 

ढूंढ़ता है आदमी, सदियों से दुनिया, में सुकून।
धूप में साया मिले, कमल जाये सहरा में सुकून।

छटपटाती है किनारों, पर मिलन की आस में
हर लहर पा जाती है, जाकर के दरिया में सुकून।

बेक़रारी है कभी, पूरे समन्दर की तरह,
और कभी मिल जाता है बस, एक क़तरे में सुकून।

ज़िन्दगी को इससे ज्य़ादा और क्या कुछ चाहिए?
लबस हो इक प्यार का, और उसके लमहात में सुकून।

हर सवाली चेहरे पे लिख़ी इबारत देखिए,
चैन है कि न आँखों में, और कौन से दिल में सुकून।

वो खुदा से कम नहीं लगता है, मुझको दोस्तो,
मेरे ख़ातिर माँगता है जो दुआओं में सुकून।

ये उसी दामन की भीनी खुशबू का एहसास है,
जो मुझे महसूस होता है हवाओं में सुकून।

मोतियों की तरह चेहरा तेरा सच्चा लगता 

मोतियों की तरह चेहरा तेरा सच्चा लगता,
हमको दुनिया में कोई और न अच्छा लगता।

तेरे माथे पे जो बिंदिया है, सलामत रखना,
ये अँधेरों में कोई चाँद चमकता लगता।

किस तरह आँख मिलायें, कभी ये तो बतला,
तेरी पलकों पे सदा शर्म का पहरा लगता।

मैंने माँगा था इबादत में, इन्हीं लमहों को,
साथ में तेरे मुझे वक्त भी ठहरा लगता।

कैसी होगी तेरी रात परदेस में 

कैसी होगी तेरी रात परदेस में,
चाँद पूछेगा हालात परदेस में।

ख्व़ाब बनकर निगाहों में आ जाएँगे,
हम करेंगे, मुलाकाल परदेस में।

बादलों से कहेंगे कि कर दे वहाँ,
आँसुओं की ये बरसात परदेस में।

रंग चेहरे पे लब पे हँसी दिल को चैन,
कौन देगा ये सौग़ात परदेस में।

तुमको महसूस होती नहीं जो यहाँ,
याद आएगी वो बात परदेस में।

हर क़दम पे नज़र तुमको आएँगे हम,
देखना ये करामात परदेस में।

ज़ेहन की वादियों में सजालो इन्हें,
काम आएँगे जज्ब़ात परदेस में।

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