रामश्याम ‘हसीन’की रचनाएँ

मुझको मेरी मुश्किलों का हल

मुझको मेरी मुश्किलों का हल बता ऐ ज़िन्दगी!
कैसा होगा आने वाला कल? बता ऐ ज़िन्दगी!

मुझको ख़ुद्दारी ने मारा है मुझे मालूम है
तू किसे क़ातिल कहेगी? चल बता ऐ ज़िन्दगी!

चाहकर भी जिससे अब तक मैं निकल पाया नहीं
किन मरासिम की है ये दलदल? बता ऐ ज़िन्दगी!

ज़िन्दगी से ज़िन्दगी भर मैं यही कहता रहा
जिसमें तुझको जी सकूँ वह पल बता ऐ ज़िन्दगी!

जब कोई रिश्ता नहीं तुझसे मेरा तो ऐ ‘हसीन’ !
क्यूँ मेरे दिल में मची हलचल? बता ऐ ज़िन्दगी!

इक बार उनसे बात हो

इक बार उनसे बात हो, ये चाहता हूँ मैं
हाथों में उनका हाथ हो, ये चाहता हूँ मैं

परवाह मुझे कब है ज़माना कहेगा क्या
हर वक़्त उनका साथ हो, ये चाहता हूँ मैं

कठिनाइयों की धूप में झूलसूँ में जब कभी
मन में शबे-बरात हो, ये चाहता हूँ मैं

जिसमें हमेशा प्यार की बातें हों हर तरफ़
इक ऐसी काइनात हो, ये चाहता हूँ मैं

क़ुदरत को जिसपे नाज़ हो, दुनिया को जिससे इश्क़
कुछ ऐसी मेरी ज़ात हो, ये चाहता हूँ मैं

जो वफ़ा की बात करते हैं

जो वफ़ा की बात करते हैं वफ़ादारी नहीं
ऐसे लोगों से हमारी दूर तक यारी नहीं

हैं यहाँ कुछ लोग, जो रखते हैं हमसे रंजिशें
नाम भी उनका अगर लें तो समझदारी नहीं

कौन—सी ये जंग हम-तुम उम्र भर लड़ते रहे
हमने भी जीती नहीं जो, तुमने भी हारी नहीं

अपनी इस ग़ैरत के कारण आज तक ज़िन्दा हूँ मैं
वर्ना कुछ लालच नहीं है, कोई लाचारी नहीं

ज़िन्दगी जीना है तो फिर ज़िन्दगी—सा जी इसे
ज़िन्दगी मर-मर के जीने में तो हुशियारी नहीं

ख़ुश रहता हूँ ग़म में भी

ख़ुश रहता हूँ ग़म में भी
ज़्यादा में भी, कम में भी

हम किसके अवगुण देखें
अवगुण हैं जब हम में भी

ऐ दिल! क्या तू पागल है
हँसता है मातम में भी

क्या मुझ जैसा दीवाना
होगा दो आलम में भी

वो भी गुस्सा होते हैं
शोले हैं शबनम में भी

शक्ल दरिया की बदल दी

शक्ल दरिया की बदल दी जाएगी
ज़िन्दगी ख़ुशियों के नग़्मे गाएगी

एक पौधा तो लगा हम भी चले
नस्ले-नौ फल-छाँव इससे पाएगी

रोकना चाहो तो ये रुकती नहीं
वक़्त की गाड़ी निकलती जाएगी

बन्द है मुट्ठी तो है ये ज़िन्दगी
रेत-सी वर्ना फिसलती जाएगी

एक को मुश्किल से पाला है ‘हसीन’
दूसरी बेटी भी क्या पल पाएगी

दिल के ज़ख़्म छुपाना सीख

दिल के ज़ख़्म छुपाना सीख
हँसना और हँसाना सीख

वो मारे, इससे पहले
तू उसपे मर जाना सीख

अब तक औरों को लूटा
अब तू ख़ुद लुट जाना सीख

धोखेबाज़ी, झूठ, फरेब
इन सबसे कतराना सीख

जाने को सब जाते हैं
तू इज़्ज़त से जाना सीख

 

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