रोहित आर्य की रचनाएँ

ईश्वर

तू ही सृष्टि बनाने वाला, इसे चलाने वाला है,
तू सबका रखवाला है
धरती से लेकर अम्बर तक, तेरा खेल निराला है,
तू सबका रखवाला है
सूरज, चन्दा और तारों को, तू ही रोशन करता है,
दुनियाँ भर की सब चीजों में, रँग हजारों भरता है।
घना अँधेरा तू कर देता, करता तू ही उजाला है।
तू सबका रखवाला है
बिना हाथ-पैरों के लाखों, कोटि जीव बनाये हैं,
है लेकिन आश्चर्य सभी ने, अलग-अलग गुण पाये हैं,
तेरा हर एक काम सभी को, ही चकराने वाला है।
तू सबका रखवाला है
न शरीर धारण करता है, मरता और न जीता है,
ज़र्रे-ज़र्रे में व्यापक तू, कुछ न तुझसे रीता है।
कर्मों के अनुसार सभी को, तू फ़ल देने वाला है,
तू सबका रखवाला है
न, अवतारों, गुरु-घण्टालों, के स्वरूप में आता है,
योगी और तपस्वी मानव, को केवल मिल पाता है।
“रोहित” सबको पीना केवल, “ओ3म्” नाम का प्याला है।
तू सबका रखवाला है

शून्य से ज़्यादा

शून्य से ज़्यादा नहीं हैं, कुछ भी हम सँसार में,
क्या अहम् है जो हमारे, सिर पै चढ़कर बोलता।

सिर्फ दो कौड़ी है कीमत, तुच्छ मानव देह की,
किसलिए ख़ुद को हे मानव, रत्न जैसे तोलता।

प्यार के दो शब्द काफ़ी, हैं जगत को जीतने,
किन्तु तू अपनी जुबां से, शब्द कड़वे बोलता॥

देख ईश्वर को ये दुनियाँ, सौंप दी तेरे लिए,
किन्तु फिर भी छीनने को, तू जहाँ में डोलता॥

खूबसूरत प्रकृति थी, उसने तुझको सौंप दी,
बनके दुश्मन किसलिये तू, विष इसी में घोलता॥

बाँटकर तो देख ले, आनन्द अद्भुत पायेगा,
क्यों न ‘रोहित’ द्वार तू, अपने हृदय के खोलता॥

श्रीकृष्ण

ऐ मेरे कृष्ण के वंशजो सब सुनो,
ज़ुल्म योगीराज पै न ढाया करो।
मानते जिसको भगवान हो तुम सभी,
मेरे श्रीकृष्ण को न नचाया करो॥1॥
ऐ मेरे कृष्ण के…
बाप-दादा के जैसे मेरे श्याम थे,
कितने सुन्दर किये उम्र भर काम थे।
स्वांग करवा के ख़ुद अपने उस पुरखे का,
खिल्ली हरगिज़ नहीं तुम उड़ाया करो॥2॥
ऐ मेरे कृष्ण के…
कितना उज्ज्वल चलन था जी घनश्याम का,
उम्र भर न किया कुछ ग़लत काम था।
देवताओं के जैसा मेरा कृष्ण था,
बोल छलिया न उसको लजाया करो॥3॥
ऐ मेरे कृष्ण के…
कृष्ण ने सुन लो माखन चुराया नहीं,
छीन कर गोपियों से भी खाया नहीं।
लाखों गायों के स्वामी मेरे कृष्ण थे,
चोर उनको न हरगिज बताया करो॥4॥
ऐ मेरे कृष्ण के…
नारी की अस्मिता पर हुआ क्रुद्ध था,
महाभारत के जैसा किया युद्ध था।
गोपियों के न कपड़े उठाये कभी,
न लफंगा उसे तुम बनाया करो॥5॥
ऐ मेरे कृष्ण के…
एक सम्राट से चूड़ी बिकवाते हो,
धूल में उसकी इज्ज़त को मिलवाते हो।
ऐसा कहते हुए शर्म आती नहीं,
बुद्धि अपनी ज़रा तुम लगाया करो॥6॥
ऐ मेरे कृष्ण के…
रास लीला नहीं गोपियों सँग करी,
कोई महिला नहीं कृष्ण ने तँग करी।
रास करवा के तुम मेरे श्री कृष्ण से,
उनको लम्पट न हरगिज़ दिखाया करो॥7॥
ऐ मेरे कृष्ण के…
न हजारों थीं उनकी सहधर्मिणी,
एक पत्नी थी उनकी सिर्फ़ रुक्मिणी।
एक ही पुत्र प्रद्युम्न पैदा किया,
आप न उन पै उँगली उठाया करो॥8॥
ऐ मेरे कृष्ण के…
राजनीति के पण्डित मेरे श्याम थे,
नीतियों में निपुण मेरे घनश्याम थे।
योगियों के थे राजा श्री कृष्ण जी,
उनका अपमान तुम न कराया करो॥9॥
ऐ मेरे कृष्ण के…
गीता जैसा अनोखा दिया ज्ञान था,
पार्थ का कर दिया दूर अज्ञान था।
कर्म करना सिखाया श्री कृष्ण ने,
उनके सम्मान को न गिराया करो॥10॥
ऐ मेरे कृष्ण के…
धर्म रक्षा के हित कंस को मारा था,
अपना भाई शिशुपाल संहारा था।
धर्म के ही लिये महाभारत किया,
ध्यान से उसको पढ़ व पढ़ाया करो॥11॥
ऐ मेरे कृष्ण के…
यज्ञ सारी उमर कृष्ण करते रहे,
भाव भक्ति के ही सिर्फ़ भरते रहे।
पाप का फल मिलेगा उन्होंने कहा,
इसलिए पाप तुम न कमाया करो॥12॥
ऐ मेरे कृष्ण के…
हमको बतलाया था ऋषि दयानन्द ने,
आप्त पुरुषों के जैसे श्री कृष्ण थे।
इसलिये उनकी जय बोलने के लिए,
हाथ “रोहित” के सँग में उठाया करो॥13॥
ऐ मेरे कृष्ण के…

श्रीराम

ऐ मेरे राम के वंशजो सब सुनो,
ज़ुल्म श्रीराम पर तुम न ढाया करो।
मानते जिनको भगवान हो तुम सभी,
मेरे श्री राम को न नचाया करो॥1॥
ऐ मेरे राम के…
बाप-दादा के जैसे श्री राम थे,
कितने सुन्दर किये उम्र भर काम थे।
स्वांग करवा के ख़ुद अपने उस पुरखे का,
खिल्ली हरगिज़ नहीं तुम उड़ाया करो॥2॥
ऐ मेरे राम के…
राम पुरुषों में उत्तम कहाये गये,
और मर्यादा में सिर्फ़ पाये गये।
स्थापित कर गये ऊँचे प्रतिमान वो,
उनके सूरज को तुम न डुबाया करो॥3॥
ऐ मेरे राम के…
धीर थे, वीर थे, राम गम्भीर थे,
मेरे भारत की वह सच्ची तस्वीर थे।
बाप की आज्ञा को मान वन को गये,
उनका यह रूप सबको दिखाया करो॥4॥
ऐ मेरे राम के…
भाइयों से उन्हें प्रेम भरपूर था,
राग और द्वेष उनसे बहुत दूर था।
माँ-पिता के लिए वह समर्पित रहे,
उनके गुण अपने जीवन में लाया करो॥5॥
ऐ मेरे राम के…
राजसत्ता से कोई न अनुराग था,
एक क्षण में किया राज्य का त्याग था।
राज्य आया-गया एक से ही रहे,
ऐसा धीरज दिलों में समाया करो॥6॥
ऐ मेरे राम के…
गुरुओं का करते सम्मान श्री राम थे,
करते संध्या-हवन वह सुबह-शाम थे।
जिन गुणों से कहाये हैं भगवान वो,
उनको जीवन में अपने भी लाया करो॥7॥
ऐ मेरे राम के …
एक पत्नीव्रता थे मेरे राम जी,
गैर नारी पै हरगिज़ न दृष्टि रखी।
अपनी को छोड़कर के किसी नारी पै,
आप दृष्टि न हरगिज़ जमाया करो॥8॥
ऐ मेरे राम के…
भेद और भाव से वह बहुत दूर थे,
प्रेम से मेरे श्रीराम भरपूर थे।
भील, वानर लिये रीछ भी साथ में,
ऐसा आदर्श तुम भी दिखाया करो॥9॥
ऐ मेरे राम के…
संग सुग्रीव ले बाली संहारा था,
ले विभीषण को लंकेश को मारा था।
साथ में ले लिये वीर हनुमान जी,
राम की नीति जीवन में लाया करो॥10॥
ऐ मेरे राम के…
नीच बाली को मारा मेरे राम ने,
उसको मरवाया उसके ग़लत काम ने।
भाई की पत्नी को छीनने पै मरा,
राम का क्रोध न आजमाया करो॥11॥
ऐ मेरे राम के…
नारी की अस्मिता के लिए लड़ गये,
इसलिए जाके रावण से वह भिड़ गये।
वंश सारा मिटा डाला लंकेश का,
उनकी गाथा को हरदम सुनाया करो॥12॥
ऐ मेरे राम के…
राम को आप बिल्कुल नचाओ नहीं,
धब्बा दामन पै उनके लगाओ नहीं।
कीजिये पूजा उनके चरित्रों की तुम,
गीत “रोहित” के सँग ख़ूब गाया करो॥13॥
ऐ मेरे राम के…

दयानन्द कहलाया था

वह आया हमें जिलाने को, ईश्वर से हमें मिलाने को,
पावन वेदों के अमृत को, आया था हमें पिलाने को।
दुनियाँ भर के पाखण्डों से, वह एक शेर टकराया था,
हम सबका रक्षक वह योद्धा, ही दयानन्द कहलाया था॥1॥
वह आया हमें…
माँ अमृत बा और कर्षन जी, का पुत्र बहुत ही प्यारा था,
था नाम मूलशंकर उसका, दिमाग चलता जी न्यारा था।
चूहे दौड़े शिव के ऊपर, देखा तो व्रत को तोड़ दिया,
सच्चे शंकर को पाने को, उसने अपना घर छोड़ दिया।
पाने को सच्चा ज्ञान यहाँ, दण्डी को गुरु बनाया था।
हम सबका रक्षक वह योद्धा, ही दयानन्द कहलाया था॥2॥
वह आया हमें…
दक्षिणा के बदले ऋषिवर से, गुरुवर ने माँग लिया जीवन,
होकर प्रसन्न मेरे ऋषि ने, अर्पित कर दिया उन्हें तन-मन,
फिर निकल पड़ा वह भारत का, खोया गौरव लौटाने को,
सब ढोंग और आडम्बर के, पाखण्डों का गढ़ ढाने को।
पाखण्ड खण्डिनी विजय पताका, को उसने फहराया था,
हम सबका रक्षक वह योद्धा, ही दयानन्द कहलाया था॥3॥
वह आया हमें…
इस पावन वैदिक संस्कृति का, जिसने भी किया तमाशा था,
उन सब दुष्टों के मुखड़े पर, ऋषिवर ने जड़ा तमाचा था।
सब पण्डे और मौलवी भी, उसके कारण भय खाते थे,
सब धूर्त, नीच और पाखण्डी, मेरे ऋषि से थर्राते थे।
प्रतिमा और कब्रों की पूजा, को उसने बन्द कराया था,
हम सबका रक्षक वह योद्धा, ही दयानन्द कहलाया था॥4॥
वह आया हमें…
जो मुल्ले और पादरी जन, जनता को मूर्ख बनाते थे,
उनकी बातों में आ हिन्दू, निज धर्म छोड़ते जाते थे।
वापस ला आर्य बना करके, हम सब पर था उपकार किया,
उन मुल्लों और पादरी पर, ऋषिवर ने भीषण वार किया।
सबसे पहले मेरे ऋषि ने, दलितों को गले लगाया था,
हम सबका रक्षक वह योद्धा, ही दयानन्द कहलाया था॥5॥
वह आया हमें…
नारी को पढ़ने-लिखने का, अधिकार यहाँ न मिलता था,
नारी के पढ़-लिख जाने से, पुरुषों का शासन हिलता था।
जिस नारी को बोला करते, यह तो पैरों की जूती है,
ऋषिवर के कारण से उसकी, हर तरफ बोलती तूती है।
नारी निर्माता होती है, ऋषिवर ने नाद सुनाया था,
हम सबका रक्षक वह योद्धा, ही दयानन्द कहलाया था॥6॥
वह आया हमें…
रहना परतन्त्र न अच्छा है, ऋषिवर ने बात चलाई थी,
भारत की सोई जनता में, एक चिंगारी सुलगाई थी।
अपना ही राज्य सर्वोत्तम है, ऋषिवर ने यह उद्घोष किया,
जिसको सुनकर के वीरों ने, था इंकलाब का घोष किया।
उस ऋषिवर के ही शिष्यों ने, भारत आज़ाद कराया था,
हम सबका रक्षक वह योद्धा, ही दयानन्द कहलाया था॥7॥
वह आया हमें…
इस दुनियाँ ने उसके ऊपर, ईंटें और पत्थर बरसाए,
फेंके उस पर विषधर काले, विष देकर उसको हर्षाए,
लेकिन मेरा प्यारा ऋषिवर, बस दयानन्द बन कर जीया,
हमको अमृत बाँटा केवल, खुद ने जीवन भर जहर पीया।
अपने हर इक हत्यारे को, ऋषिवर ने क्षमा कराया था,
हम सबका रक्षक वह योद्धा, ही दयानन्द कहलाया था॥8॥
वह आया हमें…
श्रीराम-कृष्ण के बेटों को, वह आया यहाँ बचाने को,
हम जिसको खोए बैठे थे, सम्मान हमें दिलवाने को।
“सत्यार्थ प्रकाश” दिया उसने, पावन वेदों का ज्ञान दिया,
और “आर्य समाज” बना करके, हम सबको नया विहान दिया,
“रोहित” मेरे प्यारे ऋषि ने, भारत का भाग्य जगाया था,
हम सबका रक्षक वह योद्धा, ही दयानन्द कहलाया था॥9॥
वह आया हमें…

 

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