वाजिदा तबस्सुम की रचनाएँ

ये भी क्या एहसान कम हैं देखिये ना आप का

ये भी क्या एहसान कम हैं देखिये ना आप का
हो रहा है हर तरफ़ चर्चा हमारा आप का

चाँद में तो दाग़ है पर आप में वो भी नहीं
चौदहवीं के चाँद से बढ़के है चेहरा आप का

इश्क़ में ऐसे भी हम डूबे हुए हैं आप के
अपने चेहरे पे सदा होता हैं धोका आप का

चाँद सूरज धूप सुबह कह्कशाँ तारे शमा
हर उजाले ने चुराया है उजाला आप का

या तो मिट जाइये या मिटा दीजिये

या तो मिट जाइये या मिटा दीजिये
कीजिये जब भी सौदा खरा कीजिये

अब जफ़ा कीजिये या वफ़ा कीजिये
आख़री वक़्त है बस दुआ कीजिये

अपने चेहरे से ज़ुल्फ़ें हटा दीजिये
और फिर चाँद का सामना कीजिये

हर तरफ़ फूल ही फूल खिल जायेंगे
आप ऐसे ही हँसते रहा कीजिये

आप की ये हँसी जैसे घुँघरू बजे
और क़यामत है क्या ये बता दीजिये

हो सके तो ये हमको सज़ा दीजिये,
अपनी ज़ुल्फों का क़ैदी बना लीजिये

कैसे कैसे हादसे सहते रहे

कैसे कैसे हादसे सहते रहे
फिर भी हम जीते रहे हँसते रहे

उसके आ जाने की उम्मीदें लिए
रास्ता मुड़ मुड़ के हम तकते रहे

वक़्त तो गुज़रा मगर कुछ इस तरह
हम चराग़ों की तरह जलते रहे

कितने चेहरे थे हमारे आस-पास
तुम ही तुम दिल में मगर बसते रहे

कुछ न कुछ तो ज़रूर होना है

कुछ न कुछ तो ज़रूर होना है,
सामना आज उनसे होना है

तोड़ो, फेंकों, रखो, करो कुछ भी,
दिल हमारा है, क्या खिलौना है

ज़िंदगी और मौत का मतलब,
तुमको पाना है, तुमको खोना है

इतना डरना भी क्या है दुनिया से,
जो भी होना है सो तो होना है

उठ के महफ़िल से मत चले जाना,
तुमसे रोशन ये कोना-कोना है

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