विश्वदेव शर्मा की रचनाएँ

किताब

कैसी अचरज़ भरी किताब!
इसका कोई नहीं जवाब!
कविता और कहानी हैं-
तसवीरें लासानी हैं!
भूत-प्रेत है, नानी हैं,
कितने राजा रानी हैं!
कितनी बातें छपीं यहाँ पर
इसका कोई नहीं हिसाब।
कैसी अचरज भरी किताब,
इसका कोई नहीं जवाब!

रेडियो

जादू के डिब्बे-सा हमको लगा रेडियो भाई,
बटन दबाते ही जिसमें से गाने की धुन आई!

इसमें परियाँ कैद पड़ी हैं,
गुन-गुन, गुन-गुन गाती हैं!
बाजीगर भी बंद पड़े-
जिनकी आवाजे़ं आती हैं!

खबर सुनाता एक, दूसरे ने है बीन बजाई!
जादू के डिब्बे-सा हमको लगा रेडियो भाई!

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