शकुंतला कालरा की रचनाएँ

सो जा कान्हा श्याम सलोना

सो जा कान्हा, श्याम सलोना।
कोमल-कोमल लोना-लोना,
नटखट, चंचल ज्यों मृगछौना।
सो जा कान्हा, श्याम सलोना।
चंदन पलना नरम बिछौना,
चमके जैसे चांदी-सोना।
सो जा कान्हा, श्याम सलोना।
सुंदर मुख पर लगा डिठौना,
नजर लगे ना जादू-टोना।
सो जा कान्हा, श्याम सलोना।

ठुमक-ठुमककर चलें हवाएं 

झूले पलना मेरी गुड़िया,
हौले-हौले आना निंदिया।
गोरे मुख पर काली अलकें,
थकी-थकी-सी भारी पलकें।
झूले पलना मेरी गुड़िया,
हौले-हौले आना निंदिया।
धरती सोई, नभ भी सोया,
सागर भी सपनों में खोया।
झूले पलना मेरी गुड़िया,
हौले-हौले आना निंदिया।
ठुमक-ठुमककर चलें हवाएं,
मीठी-मीठी लोरी गाएं।
झूले पलना मेरी गुड़िया,
हौले-हौले आना निंदिया।

भूरी बिल्ली आई दिल्ली

भूरी बिल्ली आई दिल्ली,
लोग उड़ाएँ उसकी खिल्ली।
चूहों की मौसी कहलाई,
तब से उस पर आफत आई।
चूहे रहते शोर मचाते,
सारे उसके सिर चढ़ जाते।
उसका रौब रहा ना कोई,
मन ही मन वह कितना रोई।
निकले ना अब म्याऊँ-म्याऊँ,
सोचे इनको कैसे खाऊँ।
हरदम रहती घात लगाए,
कोई मोटा चूहा आए।
देख समझ उसकी चतुराई,
चूहों ने इक सभा बुलाई।
सुनो-सुनो, हे बिल्ली रानी,
आई है कुत्तों की नानी।
खाती बिल्ली बारी-बारी,
आया तुम पर संकट भारी।
डर के मारे भूरी बिल्ली,
भागी झटपट, छोड़ी दिल्ली।

मुर्गे राजा बोलो जी

बड़े सवेरे जग जाते क्यों
बँधी गाँठ को खोलो जी,
नींद नहीं क्या आती तुमको
मुर्गे राजा बोलो जी।
देकर बांग जगाते तुम ही
भोले-भाले बच्चे जी,
नानी आती याद सभी को
लगते तुम ना अच्छे जी।
क्या ये अच्छी बात जरा-सा,
खुद को अरे टटोलो जी।
जाना पड़ता शाला उठकर
ढोकर बस्ता भारी जी,
दुखने लगते दोनों कंधे
दुखती पीठ हमारी जी।
बस्ता लेकर, आज हमारे
संग साथ तुम हो लो जी।
करते विनती हाथ जोड़ हम,
कल से नहीं जगाना तुम,
लंबी चादर तान नींद की-
आँख मींच सो जाना तुम।
जल्दी से हाँ करो, फैसला-
लेकर झटपट बोलो जी।

 

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