शबीना अदीब ग़ज़लें/गीत

तुम मुझे छोड़ के मत जाओ मेरे पास रहो 

तुम मुझे छोड़ के मत जाओ मेरे पास रहो,
दिल दुखे जिससे अब ऐसी न कोई बात कहो,

रोज़ रोटी के लिए अपना वतन मत छोड़ो,
जिसको सींचा है लहू से वो चमन मत छोड़ो,
जाके परदेस में चाहत को तरस जाओगे,
ऐसी बेलौस मोहब्बत को तरस जाओगे,
फूल परदेस में चाहत का नहीं खिलता है,
ईद के दिन भी गले कोई नहीं मिलता है,
तुम मुझे छोड़ के मत जाओ मेरे पास रहो.

मैं कभी तुमसे करूंगी न कोई फरमाइश,
ऐश ओ आराम की जागेगी न दिल में ख्वाहिश,
फातिमा बीबी की बेटी हूँ भरोसा रखो,
मैं तुम्हारे लिए जीती हूँ भरोसा रखो,
लाख दुःख दर्द हों हंस हंस के गुज़र कर लूंगी,
पेट पर बाँध के पत्थर भी बसर कर लूंगी,
तुम मुझे छोड़ के मत जाओ मेरे पास रहो.

तुम अगर जाओगे परदेस सजा कर सपना,
और जब आओगे चमका के मुकद्दर अपना,
मेरे चेहरे की चमक ख़ाक में मिल जायेगी,
मेरी जुल्फों से ये खुशबू भी नहीं आएगी,
हीरे और मोती पहन कर भी न सज पाऊँगी,
सुर्ख जूडे में भी बेवा सी नज़र आऊँगी,
तुम मुझे छोड़ के मत जाओ मेरे पास रहो.

दर्दे फुरकत गम ए तन्हाई न सह पाउंगी,
मैं अकेली किसी सूरत भी न रह पाऊँगी,
मेरे दामन के लिए बाग़ में कांटे न चुनो,
तुमने जाने की अगर ठान ली दिल में तो सुनो,
अपने हाथों से मुझे ज़हर पिला कर जाना,
मेरी मिट्टी को भी मिट्टी में मिलकर जाना,
तुम मुझे छोड़ के मत जाओ मेरे पास रहो.

जो खानदानी रईस हैं वो मिजाज रखते हैं नर्म अपना

ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई-नई है,
अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई-नई है।

अभी न आएँगी नींद तुमको, अभी न हमको सुकूँ मिलेगा
अभी तो धड़केगा दिल ज़ियादा, अभी मुहब्बत नई नई है।

बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँ
फ़ज़ा में ख़ुशबू नई नई है गुलों में रंगत नई नई है।

जो खानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना,
तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई-नई है।

ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा के आके बैठे हो पहली सफ़ में
अभी क्यों उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई नई है।

बमों की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं
ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है वो जिसकी ताक़त नई नई है।

रंजिशों में कब इंसा सोगवार रहता है

रंजिशों में कब इंसा सोगवार रहता है
दिल मोहब्बतों में ही बेक़रार रहता है

लौट कर नहीं आता कब्र से कोई लेकिन
प्यार करने वालों को इंतज़ार रहता है

दिल अपना इश्क़ से आबाद करके देखो कभी

दिल अपना इश्क़ से आबाद करके देखो कभी
मेरी तरह तू मुझे याद कके देख कभी

तेरी मदद को फरिश्ते उतर के आएँगे
किसी गरीब की इमदाद करके देख कभी

हाल क्या है दिल का है इज़हार से रौशन होगा 

हाल क्या है दिल का है इज़हार से रौशन होगा
यानि किरदार तो किरदार से रौशन होगा

रात दिन आप चिरागों को जलाते क्यों हैं
घर चरागों से नहीं प्यार से रौशन होगा

यही बात ख़ुद समझना यही बात आम करना

यही बात ख़ुद समझना यही बात आम करना
जो गुरूर में हो डूबा उसे मत सलाम करना

मैं बस इतना चाहती हूँ रहे चैन ज़िन्दगी में
न बहुत ख़ुशी लुटाना न सुकूँ हराम करना

मेरे मसीहा मैं जी उठूँगी, दुआएँ दे दे दवा से पहले 

मेरे मसीहा मैं जी उठूँगी, दुआएँ दे दे दवा से पहले
हयात नूर बन के आजा ग़मों की काली घटा से पहले

वो बेवफ़ा हो गया है फिर भी उसी की यादों में ग़ुम रहूँगी
ये कैसे भूलूँ कि उसने मुझसे वफ़ा भी की है जफ़ा से पहले

जो चाहते हैं मदद सभी से जलील होते हैं जहाँ में
नवाज़ती है उन्हीं को दुनिया जो माँगते हैं ख़ुदा से पहले

वतन बचाने का वक़्त है ये मकां बचाने की फ़िक्र छोड़ो
मेरे भी हाथों में दे डॉ परचम मेरे बुजुर्गों हिना से पहले

खताएँ मुझसे हुई हैं लेकिन मुझे यकीं है तू बख्श देगा
मैं हसरते दिन पुकार लूँगी तेरे कर्म को सज़ा से पहले

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