शांति अग्रवाल की रचनाएँ

कद्दू की बारात 

कद्दू जी की चली बरात,
हुई बताशों की बरसात!

बैंगन की गाड़ी के ऊपर
बैठे कद्दू राजा
शलजम और प्याज ने मिलकर
खूब बजाया बाजा!

मेथी, पालक, भिंडी, तोरी
टिंडा, मूली, गाजर,
बने बराती नाच रहे थे
आलू, मटर, टमाटर!

कद्दू जी हँसते-मुस्काते
लौकी दुल्हन लाए
कटहल और करेले जी ने
चाट पकौड़े खाए!

प्रातः पता चली यह बात,
सपना देखा था यह रात!

फूटा मटका

अभी खबर लंदन से आई,
मक्खी रानी उसको लाई!
भुनगे ने हाथी को मारा,
हाथी क्या करता बेचारा!
घुस बैठा मटके के अंदर,
मटके में थे ढाई बंदर!
उन्हें देखकर हाथी रोया,
रोते-रोते ही वह सोया!
रुकी न पर आँसू की धारा,
मटका बना समंदर खारा!
लगे डूबने हाथी बंदर,
तब तक आया एक कलंदर!
पर वह उनको पकड़ न पाया,
उसने फौरन ढोल बजाया!
उसको सुनकर आया मच्छर,
उसने लात जमाई कसकर!
फूटा मटका, बहा समंदर,
निकल पड़े सब हाथी बंदर!

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