सरोजिनी अग्रवाल की रचनाएँ

मेरे मामा

मेरे मामा बड़े निराले,
थोड़े गोरे थोड़े काले।

मुझको कहते गड़बड़झाला
पर खुद पूरे गरम मसाला,
जाने कितने तोते पाले!
मेरे मामा बड़े निराले!

काला-काला पहने चश्मा
दिखा करिश्मा देते चकमा,
चाबी बिना खोल दें ताले!
मेरे मामा बड़े निराले।

गाते मीठा-मीठा गाना
कभी डांस करते मनमाना।
लंबे बाल जरा घुँघराले!
मेरे मामा बड़े निराले!

जो गुस्सा हो जाएँ मामी
झट से देते, उन्हें सलामी,
बन जाते हैं भाले-भाले।
मेरे मामा बड़े निराले!

झंडू सेठ

मुझको कहते झंडू सेठ,
छोटा कद है मोटा पेट!

नाक पहाड़ी मिर्ची सी
कान खटाई की फाँकें,
आँखें गोल-मटोल बड़ी
इधर-उधर ताकें-झाँकें।
टूटा दाँत बनाए गेट,
मुझको कहते झंडू सेठ!

दो दर्जन केले खाकर
सात किलो पूड़ी खाता,
फिर बस सौ रसगुल्ले खा
सुबह कलेवा हो जाता।
तुरत सफाचट करता प्लेट,
मुझको कहते झंडू सेठ!

भले तखत टूटा भद्दा
मोटा सा मेरा गद्दा,
खूब मजे से सोता हूँ
ओढ़ खेस सस्ता, भद्दा।
दो कंुतल है मेरा वेट,
मुझको कहते झंडू सेठ!

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