सरोजिनी प्रीतम की रचनाएँ

गुड़िया के गहने

गुड़िया के घर आए चोर!
गुड़िया मचा सकी ना शोर
कुत्ते ने पूछा-भौं-भौं
गुड़िया रानी, तू चुप क्यों?
कौए ने पूछा-काँ-काँ
तेरे गहने गए कहाँ?
म्याऊँ-म्याऊँ कर बिल्ली,
चली गई झट से दिल्ली!
दिल्ली में जो खाया पान,
चोर लिया झट से पहचान।
लाई गुड़िया के गहने,
हँस-हँस गुड़िया ने पहने!

गूँगी गुड़िया

बोल-बोल ओ गुड़िया गूँगी,
तुझको चंदा-तारे दूँगी।
दूल्हा होगा तेरा कैसा,
बिल्कुल उस चंदा के जैसा।

चंदा जैसा दूल्हा दूँगी,
बोल-बोल ओ गुड़िया गूँगी।
आँखें तो तू गोल घुमाती,
क्या कहती? कुछ ना बतलाती।
बार-बार मैं नहीं कहूँगी,
बोल-बोल ओ गुड़िया गूँगी।

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