सुंदरदास की रचनाएँ

तेल जरै बाती जरै, दीपक जरै न कोइ

तेल जरै बाती जरै, दीपक जरै न कोइ।

दीपक जरताँ सब कहै, भारी अजरज होइ॥

भारी अचरज होइ, जरै लकरी अरु घासा।

अग्नि जरत सब कहैं, होइ यह बडा तमासा॥

दोहे

गज अलि मीन पतंग मृग, इक-इक दोष बिनाश।

जाके तन पाँचौं बसै, ताकी कैसी आश॥

सुंदर जाके बित्त है, सो वह राखैं गोइ।

कौडी फिरै उछालतो, जो टुटपूँज्यो होइ॥

मन ही बडौ कपूत है, मन ही बडौ सपूत।

‘सुंदर जौ मन थिर रहै, तो मन ही अवधूत॥

गेह तज्यो अरु नेह तज्यो

गेह तज्यो अरु नेह तज्यो पुनि खेह लगाई कै देह संवारी .
मेह सहे सिर, सीत सहे तन धूप समै जो पंचागिनि बारी.
भूख सही रहि रूख तरे पर सुंदरदास सबै दुख भारी .
डासं छांड़ीकै कासन ऊपर आसन मारयो,तै आस न मारी.

बोलिए तौ तब जब

बोलिए तौ तब जब बोलिबे की बुद्धि होय,
ना तौ मुख मौन गहि चुप होय रहिए.

जोरिए तो तब जब जोरिबे को रीति जाने,
तुक छंद अरथ अनूप जामे लहिए .

गाईए तो तब जब गाईबे को कंठ होय ,
श्रवन के सुनितहिं मनै जमे गहिए .

तुकभंग, छंदभंग, अरथ मिलै न कछु,
सुंदर कहत ऐसी बानी नहिं कहिए .

पति सूँ हीं प्रेम होय

पति ही सूं प्रेम होय, पति ही सूं नेम होय,
पति ही सूं छेम होय , पति ही सूं रात है.
पति ही यज्ञ जोग, पति ही है रस भोग,
पति ही सू मिटे सोग, पति ही को जात है..
पति ही है ज्ञान ध्यान, पति ही है पुण्य दान ,
पति ही है तीर्थ ,न्हान,पति ही को मत.
पति बिनु पति नाहिं, पति बेनु गति नाहि,
सुंदर सकल विधि एक पतिव्रत है..

सुनत नगारे चोट

सुनत नगारे चोट बिगसै कमलमुख,
अधिक उछाह फूल्यो मात है न तन में.
फेरै जब साँग तब कोऊ नहीं धीर धरै,
कायर कँपायमान होत देखि मन में .
कूदि के पतंग जैसे परत पावक माहि,
ऐसे टूटि परै बहु सावंत के गन में .
मारि घमासान करि सुंदर जुहरे श्याम,
सोई सूरबीर रुपि रहै जाय रन में.

ब्रह्म तें पुरुष अरु

ब्रह्म तें पुरुष अरु पकृति प्रगट भई,
प्रकृति तें महत्तत्व,पुनि अहंकार है .
अहंकार हू तें तीन गुन सत,रज,तम,
तमहू तें महाभूत विषय पसर है .
रजहू तें इंद्री दस पृथक पृथक भई,
सत्तहू तें मद,आदि देवता विचार है .
ऐसे अनुक्रम करि शिष्य सूँ कहत गुरु,
सुंदर सकल यह मिथ्या भ्रमजार है .

एकनि के बचन सुनत

एकनि के बचन सुनत अति सुख होई ,
फल से झरत हैं अधिक मनभावने.
एकनि के बचन पखान बरषत मानौ,
स्रवन कै सुनतहिं लगत अनखावन .
एकनि के बचन कंटक कटुक विषरूप,
करत मरम छेद, दुख उपजावने .
सुंदर कहत घट-घट में बचन भेद ,
उत्तम अरु मध्यम अरु अधम सुनावने.

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