हसरत जयपुरी की रचनाएँ

अब्शारे-गज़ल 

ये कौन आ गई दिलरुबा

ये कौन आ गई दिलरुबा महकी महकी
फ़िज़ा महकी महकी हवा महकी महकी

वो आँखों में काजल वो बालों में गजरा
हथेली पे उसके हिना महकी महकी

ख़ुदा जाने किस-किस की ये जान लेगी
वो क़ातिल अदा वो सबा महकी महकी

सवेरे सवेरे मेरे घर पे आई
ऐ “हसरत” वो बाद-ए-सबा महकी महकी

एहसान मेरे दिल पे तुम्हारा है दोस्तों

एहसान मेरे दिल पे तुम्हारा है दोस्तों
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों

बनता है मेरा काम तुम्हारे ही काम से
होता है मेरा नाम तुम्हारे ही नाम से
तुम जैसे मेहरबां का सहारा है दोस्तों
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों

जब आ पडा है कोई भी मुश्किल का रास्ता
मैंने दिया है तुम को मुहब्बत का वास्ता
हर हाल में तुम्हीं को पुकारा है दोस्तों
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों

यारों ने मेरे वास्ते क्या कुछ नहीं किया
सौ बार शुक्रिया अरे सौ बार शुक्रिया
बचपन तुम्हारे साथ गुज़ारा है दोस्तो
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों

ग़ज़लें

चल मेरे साथ ही चल

चल मेरे साथ ही चल ऐ मेरी जान-ए-ग़ज़ल
इन समाजों के बनाये हुये बंधन से निकल, चल

हम वहाँ जाये जहाँ प्यार पे पहरे न लगें
दिल की दौलत पे जहाँ कोई लुटेरे न लगें
कब है बदला ये ज़माना, तू ज़माने को बदल, चल

प्यार सच्चा हो तो राहें भी निकल आती हैं
बिजलियाँ अर्श से ख़ुद रास्ता दिखलाती हैं
तू भी बिजली की तरह ग़म के अँधेरों से निकल, चल

अपने मिलने पे जहाँ कोई भी उँगली न उठे
अपनी चाहत पे जहाँ कोई दुश्मन न हँसे
छेड़ दे प्यार से तू साज़-ए-मोहब्बत-ए-ग़ज़ल, चल

पीछे मत देख न शामिल हो गुनाहगारों में
सामने देख कि मंज़िल है तेरी तारों में
बात बनती है अगर दिल में इरादे हों अटल, चल

हम रातों को उठ उठ के

हम रातों को उठ उठ के जिन के लिये रोते हैं
वो ग़ैर की बाहों में आराम से सोते हैं

हम अश्क जुदाई के गिरने ही नहीं देते
बेचैन सी पलकों में मोती से पिरोते हैं

होता चला आया है बेदर्द ज़माने में
सच्चाई की राहों में काँटे सभी बोतें हैं

अंदाज़-ए-सितम उन का देखे तो कोई “हसरत”
मिलने को तो मिलते हैं नश्तर से चुभोते हैं

इस तरह हर ग़म भुलाया कीजिये

इस तरह हर ग़म भुलाया कीजिए
रोज़ मैख़ाने में आया कीजिए

छोड़ भी दीजिए तकल्लुफ़ शेख़ जी
जब भी आएँ पी के जाया कीजिए

ज़िंदगी भर फिर न उतेरेगा नशा
इन शराबों में नहाया कीजिए

ऐ हसीनों ये गुज़ारिश है मेरी
अपने हाथों से पिलाया कीजिए

शोले ही सही आग लगाने के लिये आ 

शोले ही सही आग लगाने के लिये आ
फिर तूर के मंज़र को दिखाने के लिये आ

ये किस ने कहा है मेरी तक़दीर बना दे
आ अपने ही हाथों से मिटाने के लिये आ

ऐ दोस्त मुझे गर्दिश-ए-हालात ने घेरा
तू ज़ुल्फ़ की कमली में छुपाने के लिये आ

दीवार है दुनिया इसे राहों से हटा दे
हर रस्म मुहब्बत की मिटाने के लिये आ

मतलब तेरी आमद से है दरमाँ से नहीं
“हसरत” की क़सम दिल ही दुखाने के लिये आ

वो अपने चेहरे में सौ अफ़ताब रखते हैं 

वो अपने चेहरे में सौ आफ़ताब रखते हैं
इसीलिये तो वो रुख़ पे नक़ाब रखते हैं

वो पास बैठें तो आती है दिलरुबा ख़ुश्बू
वो अपने होठों पे खिलते गुलाब रखते हैं

हर एक वर्क़ में तुम ही तुम हो जान-ए-महबूबी
हम अपने दिल की कुछ ऐसी किताब रखते हैं

जहान-ए-इश्क़ में सोहनी कहीं दिखाई दे
हम अपनी आँख में कितने चेनाब रखते हैं

यारो मुझे मुआफ़ करो मैं नशे में हूँ

यारो मुझे मु’आफ़ करो मैं नशे में हूँ
अब थोड़ी दूर साथ चलो मैं नशे में हूँ

जो कुछ भी कह रहा हूँ नशा बोलत है ये
इसका न कुछ ख़याल करो मैं नशे में हूँ

उस मैकदे की राह मे गिर जाऊँ न कहीं
अब मेरा हाथ थाम तो लो मैं नशे में हूँ

मुझको तो अपने घर का पता याद ही नहीं
तुम मेरे आस पास रहो मैं नशे में हूँ

कैसी गुज़र रही है मुहब्बत में ज़िंदगी
“हसरत” कुछ अपना हाल कहो मैं नशे में हूँ

ये कौन आ गई दिलरुबा

ये कौन आ गई दिलरुबा महकी महकी
फ़िज़ा महकी महकी हवा महकी महकी

वो आँखों में काजल वो बालों में गजरा
हथेली पे उसके हिना महकी महकी

ख़ुदा जाने किस-किस की ये जान लेगी
वो क़ातिल अदा वो सबा महकी महकी

सवेरे सवेरे मेरे घर पे आई
ऐ “हसरत” वो बाद-ए-सबा महकी महकी

एहसान मेरे दिल पे तुम्हारा है दोस्तों

एहसान मेरे दिल पे तुम्हारा है दोस्तों
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों

बनता है मेरा काम तुम्हारे ही काम से
होता है मेरा नाम तुम्हारे ही नाम से
तुम जैसे मेहरबां का सहारा है दोस्तों
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों

जब आ पडा है कोई भी मुश्किल का रास्ता
मैंने दिया है तुम को मुहब्बत का वास्ता
हर हाल में तुम्हीं को पुकारा है दोस्तों
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों

यारों ने मेरे वास्ते क्या कुछ नहीं किया
सौ बार शुक्रिया अरे सौ बार शुक्रिया
बचपन तुम्हारे साथ गुज़ारा है दोस्तो
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों

तकदीर का फसाना जाकर किसे सुनाएं 

तक़दीर का फसाना जाकर किसे सुनाएँ
इस दिल में जल रही हैं अरमान की चिताएँ ।।

सांसों में आज मेरे तूफ़ान उठ रहे हैं
शहनाईयों से कह दो कहीं और जाकर गायें
इस दिल में जल रही हैं अरमान की चिताएँ ।।

मतवाले चाँद सूरज, तेरा उठायें डोला
तुझको खुशी की परियां घर तेरे लेके जाएँ
इस दिल में जल रही हैं अरमान की चिताएँ ।।

तुम तो रहो सलामत, सेहरा तुम्हें मुबारक
मेरा हरेक आँसू देने लगा दुआएँ
इस दिल में जल रही हैं अरमान की चिताएँ ।।

उनसे मिली नज़र के मेरे होश उड़ गए

उनसे मिली नज़र के मेरे होश उड़ गए
ऐसा हुआ असर के मेरे होश उड़ गए

जब वो मिले मुझे पहली बार, उनसे हो गईं आँखें चार
पास ना बैठे पल भर वो फिर भी हो गया उनसे प्यार
इतनी थी बस ख़बर के मेरे होश उड़ गए
उनसे मिली नज़र के मेरे होश उड़ गए

उनकी तरफ़ दिल खिंचने लगा, बढ़ के क़दम फिर रुकने लगा
काँप गई मैं जाने क्यूँ, अपने आप दम घुटने लगा
छाए वो इस कदर के मेरे होश उड़ गए
उनसे मिली नज़र के मेरे होश उड़ गए

घर मेरे आया वो मेहमान, दिल में जगाए सौ तूफ़ान
देख के उनकी सूरत को हाय रह गई मैं हैरान
तड़पूँ इधर उधर के मेरे होश उड़ गए
उनसे मिली नज़र के मेरे होश उड़ गए

इस रंग बदलती दुनिया में

इस रंग बदलती दुनिया में
इंसान की नीयत ठीक नहीं
निकला न करो तुम सज-धजकर
ईमान की नीयत ठीक नहीं, इस…

ये दिल है बड़ा ही दीवाना
छेड़ा न करो इस पागल को
तुमसे न शरारत कर बैठे
नादान की नीयत ठीक नहीं, इस…

काँधे से हटा लो सर अपना
ये प्यार मुहब्बत रहने दो
कश्ती को सम्भालो मौजों में
तूफ़ान की नीयत ठीक नहीं, इस…

मैं कैसे खुदा हाफ़िज़ कह दूँ
मुझको तो किसी का यकीन नहीं
छुप जाओ हमारी आँखों में
भगवान की नीयत ठीक नहीं, इस…

इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम सारी रात जागे 

इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम सारी रात जागे
अल्ला जाने क्या होगा आगे
मौला जाने क्या होगा आगे
दिल में तेरी उलफ़त के बंधने लगे धागे, अल्लाह…

क्या कहूँ कुछ कहाँ नहीं जाए
बिन कहे भी रहा नहीं जाए
रात-रात भर करवट मैं बदलूँ
दर्द दिल का सहा नहीं जाए
नींद मेरी आँखों से दूर-दूर भागे, अल्लाह…

दिल में जागी प्रीत की ज्वाला
जबसे मैंने होश सम्भाला
मैं हूँ तेरे प्यार की सीमा
तू मेरा राही मतवाला
मेरे मन की बीना में तेरे राग जागे, अल्लाह…

तूने जब से आँख मिलाई
दिल से इक आवाज़ ये आई
चल के अब तारों में रहेंगे
प्यार के हम तो हैं सौदाई
मुझको तेरी सूरत भी चाँद रात लागे, अल्लाह…

इक बेवफ़ा से प्यार किया 

इक बेवफ़ा से प्यार किया उस से नज़र को चार किया
हाय रे, हमने ये क्या किया, हाय ! क्या किया
इक बेवफ़ा से …

भोली सूरत वाला निकला लुटेरा
रात छुपाए दिल में मुँह पे सवेरा

हाय रे हमने ये क्या किया …

दे गई धोखा हमें नीली-नीली आँखें
सूनी है दिल की महफ़िल भीगी-भीगी आँखें

उल्फ़त का इज़हार किया उस पे दिल निसार किया
हाय रे हमने ये क्या किया हाय क्या किया
इक बेवफ़ा से …

फ़िल्म : आवारा (1951)

इक बुत बनाऊँगा तेरा और पूजा करूँगा 

इक बुत बनाऊँगा तेरा और पूजा करूँगा
अरे मर जाऊँगा प्यार अगर मैं दूजा करूँगा
इक बुत बनाऊँगा …

रूप की चाँदी प्यार का सोना प्रेम-नगर से ला के
तेरी सुन्दर छवि बनेगी दोनों चीज़ मिला के
रंग वफ़ा का मैं तेरी मूरत में भरूँगा
अरे मर जाऊँगा …

मन-मंदिर में तुझको बिठाकर रोज़ करूँगा बातें
शाम-सवेरे हर मौसम में होंगी मुलाकातें
दिल का हाल कहूँगा तुझसे मैं ना डरूँगा
अरे मर जाऊँगा …

दुनिया एक अजायबखाना लेकिन फिर भी फ़ानी
इस धरती पर अमर रहेगी मेरी प्रेम-कहानी
चाहे जितने रूप में आऊँ तेरा रहूँगा
अरे मर जाऊँगा …

फ़िल्म : असली-नकली (1962)

तेरे घर के सामने इक घर बनाऊँगा

चाहे आसमान टूट पड़े
चाहे धरती फट जाए
चाहे हस्ती ही क्यों न मिट जाए
फिर भी मैं …
फिर भी मैं?

तेरे घर के सामने
इक घर बनाऊंगा, तेरे घर के सामने
दुनिया बसाऊँगा, तेरे घर के सामने
इक घर बनाऊँगा, तेरे घर के सामने

घर का बनाना कोई, आसान काम नहीं
दुनिया बसाना कोई, आसान काम नहीं

दिल में वफ़ायें हों तो, तूफ़ां किनारा है
बिजली हमारे लिये, प्यार का इशारा है
तन मन लुटाऊँगा, तेरे घर के सामने
दुनिया बसाऊँगा, तेरे घर के सामने
इक घर बनाऊँगा, तेरे घर के सामने

कहते हैं प्यार जिसे, दरिया है आग का
या फिर नशा है कोई, जीवन के राग का

दिल में जो प्यार हो तो, आग भी फूल है
सच्ची लगन जो हो तो, पर्वत भी धूल है
तारे सजाऊँगा, तेरे घर के सामने
दुनिया बसाऊँगा, तेरे घर के सामने
इक घर बनाऊँगा, तेरे घर के सामने

काँटों भरे हैं लेकिन, चाहत के रास्ते
तुम क्या करोगे देखें, उलफ़त के वास्ते

उलफ़त मे ताज़ छूटे, ये भी तुम्हें याद होगा
उलफ़त मे ताज़ बने, ये भी तुम्हें याद होगा
मैं भी कुछ बनाऊँगा तेरे घर के सामने
दुनिया बसाऊँगा, तेरे घर के सामने
इक घर बनाऊँगा, तेरे घर के सामने

फ़िल्म : तेरे घर के सामने (1963)

आहा आई मिलन की बेला देखो आई 

आ हा आई मिलन की बेला देखो आई
बन के फूल हर कली मुस्कुराई
आ हा आई मिलन की बेला देखो आई
उनसे नैन मिले मैं शरमाई
आ हा आई मिलन की …

जाने क्यों तेज़ हुई जाती है दिल की धड़कन
चुटकियाँ लेती है क्यों सीने में मीठी सी चुभन
प्यार जो करते हैं होता है यही हाल उनका
देखिए क्या-क्या दिखाएगी अभी दिल की लगन
आ हा आई मिलन की …

आज दुनिया मुझे कुछ और नज़र आती है
जिस तरफ़ देखिए तक़दीर मुस्कुराती है
प्यार के रंग में रंग जाते हैं जब दिलवाले
देखते-देखते हर चीज़ बदल जाती है
आ हा आई मिलन की …

आज सर से मेरा आँचल क्यों उड़ा जाता है
मेरा दिल क्यों मेरे पहलू से खिंचा जाता है
मुन्तज़िर होगा कोई याद कर रहा होगा
दर्द सा उठता है जब याद किया जाता है
आ हा आई मिलन की …

फ़िल्म : आई मिलन की बेला (1964)

आवाज़ देके हमें तुम बुलाओ

आवाज़ देके हमें तुम बुलाओ
मोहब्बत में इतना ना हमको सताओ

अभी तो मेरी ज़िंदगी है परेशां
कहीं मर के हो खाक भी न परेशां
दिये की तरह से न हमको जलाओ
मोहब्बत में इतना ना हमको सताओ

मैं साँसों के हर तार में छुप रहा हूँ
मैं धड़कन के हर राग में बस रहा हूँ
ज़रा दिल की जानिब निगाहें झुकाओ
मोहब्बत में इतना ना हमको सताओ

ना होंगे अगर हम तो रोते रहोगे
सदा दिल का दामन भिगोते रहोगे
जो तुम पर मिटा हो उसे ना मिटाओ
मोहब्बत में इतना ना हमको सताओ

आवाज़ देके हमें तुम बुलाओ
मोहब्बत में इतना ना हमको सताओ

फ़िल्म : प्रोफ़ेसर (1962).

आए बहार बन के लुभा कर चले गए

आए बहार बन के लुभा कर चले गए
क्या राज़ था जो दिल में छुपा कर चले गए

कहने को वो हसीन थे आँखें थीं बेवफ़ा
दामन मेरी नज़र से बचा कर चले गए

इतना मुझे बताओ मेरे दिल की धड़कनों
वो कौन थे जो ख़्वाब दिखाकर चले गए
आए बहार बन के …

फ़िल्म : राजहाथ (1956)

चल मेरे साथ ही चल ऐ मेरी जान-ए-ग़ज़ल

चल मेरे साथ ही चल ऐ मेरी जान-ए-ग़ज़ल
इन समाजों के बनाये हुये बंधन से निकल, चल

हम वहाँ जाये जहाँ प्यार पे पहरे न लगें
दिल की दौलत पे जहाँ कोई लुटेरे न लगें
कब है बदला ये ज़माना, तू ज़माने को बदल, चल

प्यार सच्चा हो तो राहें भी निकल आती हैं
बिजलियाँ अर्श से ख़ुद रास्ता दिखलाती हैं
तू भी बिजली की तरह ग़म के अँधेरों से निकल, चल

अपने मिलने पे जहाँ कोई भी उँगली न उठे
अपनी चाहत पे जहाँ कोई दुश्मन न हँसे
छेड़ दे प्यार से तू साज़-ए-मोहब्बत-ए-ग़ज़ल, चल

पीछे मत देख न शामिल हो गुनाहगारों में
सामने देख कि मंज़िल है तेरी तारों में
बात बनती है अगर दिल में इरादे हों अटल, चल

फ़िल्मों के लिए लिखे गीत/ग़ज़ल

जब प्यार नहीं है तो भुला क्यूँ नहीं देते 

जब प्यार नहीं है तो भुला क्यूँ नहीं देते
ख़त किस लिए रक्खे हैं जला क्यूँ नहीं देते

किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मिरा नाम
मैं हर्फ़-ए-ग़लत हूँ तो मिटा क्यूँ नहीं देते

लिल्लाह शब-ओ-रोज़ की उलझन से निकालो
तुम मेरे नहीं हो तो बता क्यूँ नहीं देते

रह रह के न तड़पाओ ऐ बे-दर्द मसीहा
हाथों से मुझे ज़हर पिला क्यूँ नहीं देते

जब उस की वफ़ाओं पे यक़ीं तुम को नहीं है
‘हसरत’ को निगाहों से गिरा क्यूँ नहीं देते

अजी रूठकर अब कहाँ जाईयेगा

अजी रूठकर अब कहाँ जाइएगा
जहाँ जाईयेगा, हमें पाइएगा

निगाहों से छुपकर दिखाओ तो जाने
ख़यालों में भी तुम ना आओ तो जाने
अजी लाख परदों में छुप जाइएगा
नज़र आईयेगा, नज़र आइएगा

जो दिल में हैं होठों पे लाना भी मुश्किल
मगर उसको दिल में छुपाना भी मुश्किल
नज़र की जुबां से समझ जाइएगा
समझकर ज़रा गौर फरमाइएगा

ये कैसा नशा हैं, ये कैसा असर हैं
ना काबू में दिल हैं, ना बस में नज़र हैं
ज़रा होश आ ले, चले जाइएगा
ठहर जाईयेगा, ठहर जाइएगा

अजी रूठकर अब कहाँ जाइएगा

देखो रूठा ना करो, बात नज़रों की सुनो

देखो रूठा ना करो, बात नज़रों की सुनो
हम न बोलेंगे कभी, तुम सताया ना करो
देखो रूठा ना करो…..

चेहरा तो लाल हुआ, क्या क्या हाल हुआ
इस अदा पर तेरी, मैं तो पागल हुआ
तुम बिगड़ने जो लगो, और भी हंसीं लगो
हम न बोलेंगे कभी, तुम सताया ना करो
देखो रूठा ना करो…..

जान पर मेरी बनी, आपकी ठहरी हंसी
हाय मैं जान गई, प्यार की फितनागरी
दिल जलाने के लिये, ठंडी आहें न भरो
देखो रूठा ना करो…..

तेरी खुशबू ने मेरे, होश भी छीन लिये
है खुशी आज हमें, तेरे पहलू में गिरे
दिल की धड़कन पे ज़रा, फूल सा हाथ रखो
हम न बोलेंगे कभी…

क्या कहेगा ये समां, इन राहों का धुँआ
लाज आए मुझे, मुझको लाए हो कहाँ
हम तुम्हें मान गए, तुम बड़े वो हो हटो
देखो रूठा ना करो…

दिल का भंवर करे पुकार 

दिल का भंवर करे पुकार
प्यार का राग सुनो
प्यार का राग सुनो रे

फूल तुम गुलाब का, क्या जवाब आपका
जो अदा है, वो बहार है
आज दिल की बेकली, आ गई ज़बान पर
बात ये है, तुमसे प्यार है
दिल तुम्हीं को दिया रे, प्यार का राग सुनो रे
दिल का भंवर…..

चाहे तुम मिटाना, पर न तुम गिराना
आँसू की तरह निगाह से
प्यार की उँचाई, इश्क़ की गहराई
पूछ लो हमारी आह से
आसमाँ छू लिया रे, प्यार का राग सुनो रे
दिल का भंवर…..

इस हसीन उतार पे, हम न बैठे हार के
साया बन के साथ हम चले
आज मेरे संग तो, गूँजे दिल की आरज़ू
तुझसे मेरी आँख जब मिले
जाने क्या कर दिया रे, प्यार का राग सुनो
दिल का भंवर…..

आप का ये आँचल, प्यार का ये बादल
फिर हमें ज़मीं पे ले चला
अब तो हाथ थाम लो, इक नज़र का जाम दो
इस नये सफ़र का वस्ता
तुम मेरे साक़िया रे, प्यार का राग सुनो रे
दिल का भंवर…

तेरी ज़ुल्फ़ों से जुदाई तो नहीं माँगी थी

तेरी ज़ुल्फ़ों से जुदाई तो नहीं माँगी थी
क़ैद माँगी थी, रिहाई तो नहीं माँगी थी

मैंने क्या ज़ुल्म किया, आप खफ़ा हो बैठे
प्यार माँगा था, खुदाई तो नहीं माँगी थी
क़ैद माँगी थी…..

मेरा हक़ था तेरी आंखों की छलकती मय पर
चीज़ अपनी थी, पराई तो नहीं माँगी थी
क़ैद माँगी थी…..

अपने बीमार पे, इतना भी सितम ठीक नहीं
तेरी उल्फ़त में, बुराई तो नहीं माँगी थी
क़ैद माँगी थी…..

चाहने वालों को कभी, तूने सितम भी ना दिया
तेरी महफ़िल से, रुसवाई तो नहीं माँगी थी
क़ैद माँगी थी…

जिया ओ, जिया ओ जिया कुछ बोल दो

जिया ओ, जिया ओ जिया कुछ बोल दो
अरे ओ, दिल का पर्दा खोल दो
जब प्यार किसी से होता है
तो दर्द सा दिल में होता है
तुम एक हसीन हो लाखों में
भला पा के तुम्हें कोई खोता है
जिया ओ जिया…..

नज़रों से कितने तीर चले
चलने दो जिगर पर झेलेंगे
इन प्यार की उजली राहों पर
हम जान की बाज़ी खेलेंगे
इन दो नैनों के सागर में
कोई दिल की नैया डुबोता है
जिया ओ जिया…

तुम भी तो इस आग में जलते हो
चेहरे से बयां हो जाता है
हर बात पे आहें भरते हो
हर बात पे दिल थर्राता है
जब दिल पे छुरियां चलती हैं
तो चैन से कोई सोता है
जिया ओ जिया…

सौ साल पहले, मुझे तुमसे प्यार था

सौ साल पहले, मुझे तुमसे प्यार था
आज भी है और कल भी रहेगा
सदियों से तुझसे मिलने, जिया बेक़रार था
आज भी है और कल भी रहेगा

तुम रूठा ना करो
मेरी जाँ मेरी जान निकल जाती है
तुम हँसती रहती हो
तो इक बिजली सी चमक जाती है
मुझे जीते जी ओ दिलबर, तेरा इंतज़ार था
आज भी है और….

इस दिल के तारों में
मधुर झनकार तुम्हीं से है
और ये हसीन जलवा
ये मस्त बहार तुम्हीं से है
दिल तो मेरा सनम, तेरा तलबगार था
आज भी है और…..

इन प्यार की राहों में
कहो तो अब दिल को लुटा दूँ मैं
ओ चाँदी के क़दमों में
धड़कते दिल को बिछा दूँ मैं
तुझे मेरे जीवन पर सदा इख़्तियार था
आज भी है और…

ऐ गुलबदन, ऐ गुलबदन 

ऐ गुलबदन, ऐ गुलबदन
फूलों की महक, काँटों की चुभन
तुझे देख के कहता है मेरा मन
कहीं आज किसी से मुहब्बत ना हो जाए

क्या हसीन मोड़ पर आ गई ज़िंदगानी
के हक़ीक़त न बन जाए मेरी कहानी
जब आहें भरे ये ठंडी पवन
सीने में सुलग उठती है अगन
तुझे देख के…

मैं तुम्हीं से यूँ आँखें मिलाता चला हूँ
के तुम्हीं को मैं तुमसे चुराता चला हूँ
मत पूछ मेरा दीवानापन
आकाश से ऊँची दिल की उड़न
तुझे देख के…

मैं चली, मैं चली पीछे-पीछे जहां

मैं चली, मैं चली पीछे-पीछे जहां
ये न पूछो किधर, ये न पूछो कहाँ
सजदे में हुस्न के, झुक गया आसमाँ
लो शुरू हो गई, प्यार की दास्ताँ

जाओ जहाँ कहीं आँखों से दूर
दिल से न जाओगे मेरे हुज़ूर
जादू खिज़ाओं का छाया सुरूर
ऐसे में बहके तो किसका क़ुसूर
सजदे में हुस्न के…

बहके क़दम चाहे, बहके नज़र
जाएँगे दिल ले के जाएँ जिधर
प्यार की राहों में प्यारा सफ़र
हम खो भी जाएँ तो क्या है फ़िक़र
मैं चली, मैं चली…

छलके तेरी आँखों से 

छलके तेरी आँखों से शराब और ज़ियादा
खिलते रहें होंठों के गुलाब और ज़ियादा

क्या बात है जाने तेरी महफ़िल में सितमगर
धड़के है दिल-ए-ख़ाना-ख़राब और ज़ियादा

इस दिल में अभी और भी ज़ख़्मों की जगह है
अबरू की कटारी को दो आब और ज़ियादा

तू इश्क़ के तूफ़ान को बाँहों में जकड़ ले
अल्लाह करे ज़ोर-ए-शबाब और ज़ियादा

खिलते रहे होठों के गुलाब और ज़ियादा

जाने कहाँ गए वो दिन

जाने कहाँ गए वो दिन
कहते थे तेरी राह में नजरों को हम बिछाएँगे
चाहे कहीं भी तुम रहो
चाहेंगे तुम को उम्र भर तुमको ना भूल पाएँगे

मेरे क़दम जहाँ पड़े सजदे किए थे यार ने
मुझको रुला-रुला दिया जाती हुई बहार ने

अपनी नजर में आज कल दिन भी अन्धेरी रात है
साया ही अपने साथ था साया ही अपने साथ है

जाने कहाँ गए वो दिन
कहते थे तेरी राह में नजरों को हम बिछाएँगे

कल खेल में हम हो न हों गर्दिश में तारे रहेंगे सदा
ढूँढ़ोगे तुम, ढूँढ़ेंगे वो, पर हम तुम्हारे रहेंगे सदा

रहेंगे यहीं अपने निशाँ, इसके सिवा जाने कहाँ
जी चाहे जब हमको आवाज़ दो, हम हैं वहीं, हम थे जहाँ

हम हैं वहीं, हम थे जहाँ इसके सिवा जाना कहाँ

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