हीरालाल की रचनाएँ

परतों का अन्तर्विरोध 

नदी जो ऊपर से एक दिखती है,
कई परतों से बनी है।
नदी, जो ऊपर-ऊपर जोरों से बहती है
नीचे जाकर हो गई है शान्त।
चट कर गए हैं उसकी ऊर्जा को
उसकी अपनी ही परतों के अन्तर्विरोध।
ऊपर से जवान दीखने वाली
यह पहाड़ की लड़की
अन्दर से बूढ़ी हो रही है।

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