हेमा पाण्डेय की रचनाएँ

दहेज

सपने कहाँ खो गए
मन में हजार सपने थे
जिंदगी को एक
नया मोड़ मिलेगा
नई आशायें जागी
मन कहता कभी
ये कभी वह करूँगा
पर सपने जाने
कहा खो गए
शादी का दिन
हजारों की ख़्वाबो
के साथ किया
गृह प्रवेश
मानो हो गया
हो कोई गुनाह
एक ही आवाज
हर तरफ से
क्या क्या लाई हो।
कुछ नहीं लाई
कैसे घर में
शादी कर दी
हो गयी लड़के
की ज़िन्दगी बर्बाद
ये सुनकर मन
था उदास
कह नहीं सकती
आस पास
मन में उठा
एक सवाल
सब कुछ क्या
होता हैं
लड़की और
भावनाओं की
नही होती कद्र
अरमानों को
डालते चिता में
खुशी के लिए
करते है शादी
आशाओ को खोखला
करता है दहेज़
शादी नुमा गुलाब में
कब तक रहेगा ये काटा
कम करता रहेगा
इसकी खूबसूरती को
कब तक कभी मन से
कभी तन से मारी
जाती रहेगी बेटियाँ

प्रकृति ने सिखाया जीना

मैंने अपने थके कदमों को देखा
अंधकार पर नजर डाली
लेकिन डरने की क्या बात है
मैं धरती के साथ हूँ
धरती मेरी माँ है
धरती मेरा साथ देगी
मैने आगे चलना शुरू किया
घास की भीनी सुगन्ध
पत्थरों की शीतलता
मिट्टी की शक्ति मैंने अपने
तलवों के नीचे महसूस की
मैंने बाजू फैला कर
हवा को छुआ
धीरे धीरे दोहराना
शुरू किया
माँ, तेरी पहाड़ियाँ, बर्फ़ानी पर्वत
जंगल मुस्करा रहे है
मैं तुम्हारे साथ ही खड़ी हूँ
मैं हार नहीं सकती
मुझे कोई चोट नहीं पहुँची
मुझे घाव नहीं लगे, मैं पूर्ण हूँ
मुझे कोई खत्म नहीं कर सका
तरह तरह के पौधे और
फूलों की डालियाँ
मेरे रास्ते में झुक-झुक आई
पंछी मेरे साथ सीठीयाँ बजा रहे थे
सावन की बून्दें कमल के पत्तों पर
जल तरंग बजा रही थी
मैंने अपने आप को आशावान
इंसान के रूप में पाया।

मानव फिर गढ़ेगा खुद को

इन्सान का अपना
प्रिय संगीत टूट रहा है।
वह अलग हो रहा है,
अपने लोगो और प्रकृति से।
खो रहा है निजी एकांत,
रात का खामोश अँधेरा भी।
कहाँ है वह जीवन
जिसे हमने खो दिया।
जीवन जीने में ही
जीवन को पाना है।
अपनी पूरी ताकत
अमेध जिजीविषा।
ज़िंदा है अथाह
गरीमा के साथ।
ऐसे चौराहे पर है खड़ा
आज का इन्सान।
उसके आगे का रास्ता
गुजरता है अंधेरी सुरंग से।
एक तरफ नई सभ्यता
ले रही अगडाइयाँ
दुसरी तरफ खून देने
वाले इन्सान भी।
टेक्नोलॉजी ने पाट दी
भौगोलिक दूरियाँ भी।
वही इंसानो के बीच
पैदा करदी है अथाह दूरियाँ।
चुनोतियाँ ज्यादा
समाधान कम।
एक इन्सान दूसरे के
सर पर पैर रखकर
निकल जाना चाहता।
आपाधापी में उसका
छुट्ता जा रहा है
सहज स्वाभाव॥

मित्रता का बीज बोये

तुम्हारा मित्र है
तुम्हारी अकांझाये
समुत्रित है तुम्हारा
कृषि झेत्र, जिसे तुम
बोते हो, स्नेह से
और काटते हो
फसल कृतघ्नता से
क्योकि नि: शब्द उपजते
और बोते जाते है सारे विचार
समस्त अभिलाषाएँ,
सारी अपेझाये
उस आनन्द के साथ
जिसमे नहीं होता
कोई जय घोष॥
लेकिन कितना हम
अमल कर रहे है
कही यही सच तो
नही, की हम मित्रता
का बीज बोने का
वक्त ही नहीं तलाश
पा रहे है। दोस्ती की
खेती खुशीयो की
फसल लेकर आती है
लेकिन उसके लिए
परस्परिक विशवास
की जमीन और अपनत्व
की उष्णता के बीज भी
तो पास होना चाहिए॥

तुम्हारे बच्चे तुम्हारे नही

वे तुम्हारे साथ जीते है,
तुम उनके मालिक नहीं हो।
तुम उन्हें अपना प्रेम,
दे सकते हो विचार नही।
उनके शरीर तुहारे घर में
रहते होंगे, आत्माएँ नही।
उनकी आत्माएँ कल
के घर में रहती है,
जहाँ तुम सपनो में
भी नहीं जा सकते।
वे आपके पास जीवन
की धरोहर है।
प्रेम तो रहे,
जीवन की पकड़ न रहे।
प्रेम कीखुबसुरती तभी
रहती है,
जब उसमे कुछ दूरी हो।
माता पिता का प्यार हो,
माली की तरह।
माता, पिता बनना,
एक अवसर है।
जीवन का एक हिस्सा,
आपके हाथ में है।
जिसे आपको शिल्पित करना है।
उस रचना का आनन्द ले,
फिर उसे जीने के
लिए मुक्त कर दे।
आप अपने बच्चे को
जितनी स्वतंत्रता देगे,
उतना वह आपके
प्रति कृतज्ञ रहेगा।
आपसे गहरे जुड़ा रहेगा।
आपका स्वमं के प्रति,
भी कुछ दायित्व है।
कुछ पल आँखे बंद कर बैठे।
आती जाती सांस पर ध्यान दे।
आप हौले-हौले अंत,
सरोवर में डूबते जाओगे।
आपकी शांति अपने
परिवार के लिए, आशीष
बन महकती रहेगी॥

अपनी नायिका खुद बना जाए

सृष्टि में परिवर्तन
अहोरात्र सम्पन्न हो रहा है
अपनी तमाम पुरातन
छवियों को तोड़ता हुआ
जीवन एक नए समय में
चला आया है।
ऐसे में ज़रूरी है कि
स्त्री भी अपने अंधेरो
और उजालो को
अब नई रोशनी में देखें
विमर्शों की पुरातन
केंचुल के बाहर
अपनी सम्भावनाओ को
ईमानदारी से तराशा
आखिर दर्द की सीली
अंधेरी रातों के बाद
एक भोर फुट रही है।
फिर क्यो पृष्ठ प्रेषण किया जाए
क्यो पुरानी टीसों को ढाल बनाकर
इस नए समय में
सुरझाये तलाशी जाए
क्यो स्त्री होने को एक
अवसर की तरह जिया जाय
क्यो न अपने जीवन की
नायिका कुछ इस तरह बना जाएँ।

बेटियों को समर्पित

बेटियाँ न हो तो,
हर त्यौहार सूना है।
धरा से लेकर, सारा
आसमान भी सूना है।
नन्हे कदमों की आहट से,
दिल मेरा धड़कता था।
तेरी पायल की रुनझुन से,
मधुर संगीत बजता था।
तुझे लेकर मैने, अपनी,
दुनिया ही बना डाली।
समय के साथ चलकर के,
एक दुनियाँ सजा डाली।
आये कोई भी त्योहार,
या कोई हो शादी, ब्याह।
रौनक होती है तुझसे ही,
मस्त पवन जैसी दरकार।
पढ़ लिख कर तू बड़ी हो गई,
आत्मनिर्भर की ली चादर ओढ़।
बनी सहारा न सिर्फ़ अपनी,
दिया सहारा औरो को।
शहनाई की गुज में तूने,
एक इतिहास बना डाला।
सफल वैवाहिक जीवन देकर,
नया संसार सजा डाला।

यादों की महकती खुशबू 

जिस भी उम्र में जो,
चीज दिल को छूती है।
यादो में शामिल हो जाती है,
कोई गहरी संवेदना बचपन मे
जब पहली बार हमें छूती है।
परिभाषित होती है लगता है
जैसे एक रूप में ढलकर,
एक आहट बनकर टहलकर
अपनी बात कह रही है।
जिंदगी का कोई पहलाहसास,
जो हमारी रूह तक उतर जाता है।
वही हमारी ज़िन्दगी हो जाता है।
अब भी ज़िन्दगी के हर पड़ाव पर,
जिंदगी को जी लेना चाहती हुँ।
किसी नगमे का दामन थाम लेती हूँ।
आज भी मेरे अहसास के वहम
पूर्वाग्रह व नकारात्मक तंरगे,
मन के आसमान में छा जाते है।
रात का अंधियारा कर लेते है।
जीने की आस किसी कोने में,
बैठ कर सुबकने लगती है।
तब साहिर का ये गीत,
मेरे अंदर गूँजने लगता है…
इन काली सदियो के सर पे
जब रात का आँचल ढलकेगा
जब दुख के बादल पिघलेंगे
तब सुख का सागर छलकेगा
जब अम्बर झूम के नाचेगा
जब धरती नगमे गायेगी
वो सुबह कभी तो आएगी
वो सुबह हमी से आएगी॥

युवावस्था

युवावस्था आये
और सपनों की
फसल न उगे
ऐसा सम्भव नही
इसलिए हमारी
नवयुवा पीढी की
आँखे भी सपनो की
फसलों से लहलहा
रही है बल्कि हमारी
आज की युवा पीढी
के पास अगर बड़े
सपने है तो उन्हें पूरा
करने की एक जिद भी है
युवा दोस्तों, सपने देखना
तो खुली आँखों से देखना
तुम्हारी आँखे ही
तो वह रास्ता है
जो ज्ञान को मस्तिक्स
तक पहुचाता है
अपने सपने को रगते हुए
किसी को भी ये छूट न देना
कि कोई तुमसे एक
भी रँग छीन सके॥

वी कैन डू एनीथिंग

रंग है जितने जीवन के
रंग बिरंगी है उतनी
आज कहानी युवती की
खूब कमाने, खूब खर्च
नए दौर की ये युवती
मुहावरे बदल दिए जीवन के
एनीथिंग कर गिरिफ्त
परिश्रम पड़ा है ज्यादा
संघर्षो कर सामना
हो गयी है वह सझम
खुद को करे सिढ
मुश्किल रहा सफर
बावजूद घर, सम्माज के
बन्धन कर डाले ढीले
ख़ास मुकाम बना डाला
ये गुर सीख लिया है प्यारे
आत्मविशवास की वह सीढ़ी
औरो ने भी चढ़ डाली
सफर रहा जोखिम से भरा
कहलाया रोमांच भरा
पीछे मुड़कर देखा जब
सफलता अपने संघर्षो की
मन पुलकित हो गया कभी
अपनी पीठ थपथपाई तभी तभी॥

संकल्प 

बन्द पलकों के पीछे
चमकता उम्मीद
का जुगनू।
एक अलसाये
ख्वाब की अंगड़ाई.
जागती आँखों से बुने
इसी सपने के हाथ पैर।
हौसले की आगमें
तपा संकल्प का सोना
और मिल गई मंजिल।
कोई कोमल विचार
कही किसी मोड़
पर उगा एक इरादा।
सोच समझ कर
की गई मेहनत
हर मुश्किल छटती है तब।
निगाह के येन सामने
खिल उठता है
कामयाबी का सबेरा।
दृढ़ इच्छा शक्ति
लग्न सकारात्मकता
और सच्चाई की ताकत
इनसे मिलकर कोई
संकल्प, आत्मा में
अखुआता है।
मन मस्तिक्स में
परवान चढ़ता है।
स्वप्न शहर से चलकर
यथार्त धरा पर।
सवार होकर
बदल देता है
जिंदगी के सब नक्स॥

विश्वास

सृष्टि के रहस्य कितने व्यापक है
हमारे एक संकल्प के मूल में
अनुभूतियों का सागर है
भावनाओ का प्रवाह है
भावनाओ, अनुभूतियों के मूल में
हमारे गहनतम विश्वास है
भावनाएँ हमारे जीवन का बैरोमीटर है
वे आश्चर्यजनक सटीकता के साथ
भविष्य की घोषणा करती है
भविष्य के छिपे तूफानों
और शांति का संकेत देती है
हमारी भावनाएँ हमारी
आत्मा का भाव प्रवण यूटोपिया है
तुम्हारे वश में वह सब है
जिसका तुम्हे यकीन है
तुम वही हो जो तुम सोचते है
हम जो कुछ भी है अपने
विचारों की विश्वाशो की उपज है
और इन्ही से हम
इस दुनियाँ को रचते है
विश्वास हमारी सफलताओ
असफलताओं में
हमारी खशीयों और
वेदनाओं को तय करता है।
भावनाएँ पृकृति के दिये सबसे
सुन्दरतम उपहारों में से एक हैI
इन्हें पहचाने, इनका सदुपयोग करे
इनके सेवक नही, इनके स्वामी बने।

आत्म आंकलन

हमारे जीवन की
गुणवत्ता हमारी क्रियाओ,
हमारे विचारो
हमारे संघर्षो की
प्रतिध्वनि है।
हम तक वही
लोट रहा है
जो हमने दिया।
इन पलो से गुजरते
करे आत्म आवलोकन।
अतीत के काम में
हमने कैसे सुर फुके.
वर्तमान की मिट्टी में
हम क्या बो रहे है।
जीवन की इस कथा को
हम कैसे लिख रहे है।
जीव कि भौतिक स्थितियाँ
बेहतर कर देने से
जीवन हो जाता बेहतर।
मानव के लिए नही
होता इतना पर्याप्त
स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग का
बेहतर परिणाम।
जीवन की गुडवत्ता के
बेहतर होने का
पर्यायवाची नहीं है॥

सुखी जीवन का रहस्य 

प्रोधोगिकी समाज,
मानसिक व्याधी का
है उत्पादक।
व्याधि है सबसे बड़ी
अकेलापन व्यक्ति का
अकेले पन से है घबराया,
भयभीत भीतर से
है शक्तिहीन बहुत।
लगता है भय दुसरो से
भयभीत है वह खुद से,
सुखी जीवन का सूत्र है
पारस्परिक स्वस्थ सम्बन्ध।
स्वस्थ सम्बन्ध
रखने वाले लोग,
प्रशन्न और रहते है
तनाव मुक्त।
मनुष्य जीवन में
बहुत बड़ा महत्त्व है
पारस्परिक सम्बन्धो का
घर परिवार के
अलावा भी रहते है,
जिस दुनिया में।
हम करते है काम,
अपने मित्रो और
दोस्तों के साथ।

साँसों की रेल गाड़ी चाँद के गाँव

कुदरत गाती है
मोहब्बत के नगमे
नदियाँ खिल खिलाती हुई
अनन्त की और
आसमान पर रची
दिलकश पेंटिग
संग संग फूलो ने बाढ़ दी
हवा के आँचल में
खुशबु के रुमाल की गाँठ
खेलते है मौसम हर बरस
पकड़म पकड़ाई
दरख़्त कर देते है बदलाव
चुपके से आता है एक मौसम
राजा ऋतुओ का
गुनगुनाते है हम
तब लताये शर्माती है
झूमते है दरख्त
मुस्कुराती है बहारें
जिंदगी इस मौसम की तरह
खुशगवार रहे हरदम।
दुहरानें होंगे सकारात्मकता के मन्त्र
यदि हो पाया ऐसा
फर्राटे भरेगी साँसों की रेलगाडी
पहूँचेगी चाँद के खूबसूरत गॉव तलक।

कैसी है आज की औरत 

वह समझती है
अपनी परम्पराओं को
आधुनिकता का
भी है उसे ज्ञान
घर में अब भी माँ है
जिस पर पूरा परिवार
रहता है निर्भर
और साथ ही उसने
घर से बाहर
एक नया रूप भी
अख्तियार किया है
जो प्रोफेसनलिज्म में
किसी से कम नही
समय के साथ
बदलती गई है
औरतो की सूरत
गाँव की स्त्री का
नया चेहरा
न रही अबला न
पुजन की औरत
सोशल साइट्स पर
है लड़कियाँ
मुस्लिम महिलाओं का
भी बदला है जीवन
बदली है औरत के
काम की जगह की अब
होती नहीं जुवां
सुंदरता की लिखी
है अब नई व्याख्या
ऐसी है आज की औरत

सत्य की अमरता

सत्य की खातिर सुकरात
ने पिया जहर का प्याला
नही डिगा पाया उनके इरादों को
मौत का भी।
इस तरह एक महान जिंदगी
सच्चाई के मोर्चे पर गयी हारI,
सत्य को अपने आचरण में
जीने वाले लोग सदियों से
धरती पर न सही
इतिहास में सदा अमर रहे है।
सुकरात भी उन्ही में से एक थे
यूनान के महान दार्शनिक
सुकरात का जीवन,
उनके आदर्शो और सिद्धांतों
का सजीव उदाहरण है।
उन्होंने दार्शनिकता को
फलक से उतार कर
जमीं पर लाकर खड़ा कर दिया।
उनकी चेतना में थी
इतनी सर्जन झमता थी
कि आगे दो पीढ़ियों तक
अपनी धारा को चला सके.
उनके आखरी अल्फाज थे
मै सत्य हूँ-सत्य कभी नहीं मरता

तेज कदम राहें

अपनी ख्वाहिशों की लगाम
अपने हाथ में लेकर
अपने मर्जी का मालिक बनकर
अनजानी पगडंडियों पर
चलने का जोखिम,
आनन्द जोखिम लेने में
अपना सूरज खुद बनाने में
अपनी राहे खुद चुनने में
मर्जी का मालिक बनने में
सफर कठिन हो सकताहै
लेकिन होगा मुकम्मल
एक सफर है
जो न जाने कब शुरू हुआ
कब खत्म होगाएक
औरत का सफर
इस सफर में कुछ
और दिल मिले
एक जैसी उम्मीदों
संकोचों हौसलों
लगातार ताजी हवा की
खिड़कियों के साथ
इस सफर के कई किससे
सच्चे, असल नाम के
ये सफर किसी के नाम
उसके काम, सफलताओं का नही
सफर है खुद को ज़िंदा रखते हुए
नाम है आगे बढ़ने का
एयर होस्टेस की अच्छी बात
सबसे पहले करे सुरझा खुद की
कितनी सच्ची, कितनी अच्छी

मेरे हो

मेरे ख़्वाब की
ताबीर हो तुम
मेरे लिए एक जागीर हो तुम
तुम्हें पाने की
तमन्ना की थी मैंने
इसी हकीक़त के
तलबगार हो तुम
इतनी इनायत
करते रहना
मेरे हम सफर
मेरे हम राज हो तुम
हर राज तुमसे
बयाँ किया है मैंने
एक राजदार
भी हो तुम
विश्वास को विश्वास
में बदलने वाले
यही बिश्वास हो तुम
कभी ये सफर
न रुकने पाये
इसी लिए इस सफर में
हमराज हो तुम

प्रेम

प्रेम के जिस तल पर
मैं खड़ी थी
और जहाँ मैने चाहा
कि कोई खड़ा होकर मेरी ही
तल पर निहारें मुझे
चाहे मेरी बुद्धि
किसी को भी वहाँ पर
घसीटते हुए ले जाती रही हो
लेकिन कोई वहाँ तक
पहुंच नहीं पाया
मैं वहाँ खड़ी होकर
किसी को पुकारती हूँ
मेरी पुकार जाने कहाँ-कहाँ से
टकराकर सब लोट आती है।
फिर मुझ तक
प्रेम के उस बिंदु पर
किसी को खड़ा नहीं पाती मैं
लेकिन फिर भी मुझ
अकेली के खड़े रहने से
बिंदु नहीं डगमगाता।
लगता है जैसे कोई तो है
जो उस बिंदु का
संतुलन बनाये हुए है
जिस पर मैं खड़ी हूँ
बहुत पास, जैसे
प्राणों के करीब कोई.
अजनबी फिर भी
खड़ा ही रहता है।

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