Skip to content

Atul-kanak.jpg

हा ! आज

आज
माता-पिता की शादी की
सत्तावनवीं वर्षगाँठ थी
और मैं बचता रहा माँ को बधाई देने से
बधाई देना तो दूर की बात है
आज उल्लास की
कोई बात भी नहीं की घर में ।

माँ ने सीधे-सीधे तो कुछ नहीं कहा
पर, जैसे याद दिलाने की
करती रही है कोशिश बार-बार
कभी इस बहाने से
तो कभी उस बहाने से ।

सात साल पहले
जब पचास बरस पूरे हुए थे
माता-पिता के विवाह को,
इतना उत्सव रहित नहीं था मैं
कि मैंने ख़ुशबू से भिगो दिया था
अपनी सामर्थ्य भर आसमान
और बधाई संदेश उकेर दिए थे
हवा की अँगडाइयों पर भी

उस साल पिता को
भेंट में दिया था जो कुर्ता-पायजामा,
वह अभी भी उदासी ओढकर
गुमसुम पडा है मेरी अलमारी में
न वो मुझसे कुछ कहता है
न मैं जुटा पाता हूँ हिम्मत
उससे बात करने की
कि आज भी ख़ामोश रहा
अलमारी में रखा वह कुर्ता-पायजामा
और आज भी जानबूझ कर
अनदेखा कर दिया मैंने उसे
पिता को ही नहीं मंज़ूर मुझसे बतियाना
तो कपडों से तो
बात भी क्या करे कोई ?

आज
माता-पिता की शादी की
सत्तावनवीं वर्षगाँठ थी
और मैंने माँ को नहीं दी बधाई /
कि आज मैंने
फूल भी नहीं चढाए
अपने स्वर्गवासी पिता की तस्वीर के आगे ।

दस बरस बाद

पत्नी की तबियत ठीक नहीं थी
और रात भर कराही थी वह
मुझे अच्छी नहीं लगी थी
उसके कराहने की आवाज़
कि एक प्रेमगीत लिखते हुए
बार-बार भंग हो रही थी एकाग्रता
और टूट रही थी लय भी ।

आज
पत्नी ने घर से फ़ोन कर
बताना चाहा था मोबाइल पर
कि पहले से
ठीक महसूस कर रही है वह,
मगर मुझे अच्छा नहीं लगा
टेलीफ़ोन कॉल का यह अपव्यय
जब दफ़्तर से निकलते ही
सीधा घर पहुँचता हूँ मैं
तो क्या ज़रूरत थी
संवाद की इस विलासिता की ?

दस बरस पहले
प्रेम विवाह किया था मैंने
और उसके बाद, अभी तक
किसी तरह जुटाए रख सका हूँ हिम्मत
प्रेम-गीत लिखते रहने की,
बिजली-टेलीफ़ोन-परचूनी वाले के बिल
बेटी के स्कूल की मोटी फ़ीस
और लगातार बढ रही
मकान ऋण की किश्त के दबाव के बावजूद

शायद इसलिये
कि प्रेम-गीत छपने पर
मिलने वाले पारिश्रमिक से
हो जाता है
दो-चार वक़्त की सब्ज़ी का इंतज़ाम ।

वह पाग़ल !
आज भी यही समझती है
कि फागुन उतना ही बौराया होगा
जितना दस बरस पहले था
हाँ, दस बरस पहले
उससे प्रेम विवाह किया था मैंने ।

Leave a Reply

Your email address will not be published.