रूपम झा की रचनाएँ

निशाक बात नहि करू

निशाक बात नहि करू
ई अश्रुपात नहि करू

चलू पहाड़ तोडिक
हवाक वाट मोडि क
इजोत ताकि लेब हम
लहाश गात नहि करू
ई अश्रुपात नहि करू

किरण अखन जगा रहल
नवल प्रभात गा रहल
प्रकाश मे चलू अखन
हृदय मे घात नहि करू
ई अश्रुपात नहि करू

उठु आ झूठ सँ लडू
सुकर्म लेल किछ करू
डेराउ नहि बिहाडि सँ
बेकार बात नहि करू

 

अनहारक हम हरब

धराक गुजगुज अनहारक हम हरब
हम निरंतर दीप बनि-बनि कड जरब

मोन सँ आसा ने कखनहुँ घटि सकत
खूब पावन कर्म के गंगा बहत
रहब हम संघर्षरत जा धरि बचब
ज्ञान के नव-नव शिखर नित-नित चढ़ब

गीत नूतन पसरि जायत बाध-बन धरि
स्वर हमर गूँजैत रहत धरती गगन घरि
रहब हम माँटीक कण-कण मे समाहित
धरा पर नित पुष्प बनि-बनिक बहब

काँट पर चलिते रहै छी राति-दिन
होयत अछि कखनहुँ मुदा नहि मुख मलिन
हम सदतिखन बाट पर चलिते रहब
सूर्य के बटी छलहुँ नित नव उगब

नहि बजैछी, की बाजब हे

नहि बजैछी, की बाजब हे
बहिर बौक आकाश बनल छी

आमक, नीमक गाछ शांत अछि
प्रात काल अछि पात शांत अछि
एहने दृष्य बनल अछि नित-नित
झलफल साँझ जका ओझल हम
लघुतम अंतिम साँस बनल छी

दाना चिड़ै चुनै अछि संगहि
संगही गाछक फूल खिलै अछि
मुदा एतय हम देख रहल छी
लोक-लोक सँ जरय मरै अछि
टुटल-फुटल विश्वास बनल छी

अगला-पिछला साल एक रंग
नहि देखैत छी किछु परिवर्तन
फाटल गुदरी सन लगैत अछि
आपन जीवन आनक जीवन
पतन शील इतिहास बनल छी

आसिन के पहिल भोर

आयल आसिन के पहिल भोर
स्वगत मे खग सभ करय शोर

चारू दिश शीतल मंद पवन
फूजल रविक राजीव नयन
धरतीक पुष्पित आँचर पर
सरिता लै अछि चंचल हिलोर
आयल आसिन के पहिल भोर

झरि गेल धरा पर हरसिंगार
अनुपम अछि ई फूलक पथार
शीतक मोती छिरियायल अछि
नेना सन नभ के लाल ठोर
आयल आसिन के पहिल भोर

खग कलरब सँ अछि तृप्त कान
आयल कण-कण मे नवल प्राण
सुगबुगा रहल अछि नव किसलय
अछि सजल धराक पोर-पोर
आयल आसिन के पहिल भोर

 

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