चंद्रदत्त 'इंदु'

चंद्रदत्त ‘इंदु’ की रचनाएँ

बोल मेरी मछली

हरा समंदर गोपी चंदर,
बोल मेरी मछली कितना पानी?
ठहर-ठहर तू चड्ढी लेता,
ऊपर से करता शैतानी!
नीचे उतर अभी बतलाऊँ,
कैसी मछली, कितना पानी?
मैं ना उतरूँ, चड्ढी लूँगा,
ना दोगी कुट्टी कर दूँगा!
या मुझको तुम लाकर दे दो,
चना कुरकुरा या गुड़धानी!
दद्दा लाए गोरी गैया,
खूब मिलेगी दूध-मलैया!
आओ भैया नीचे आओ,
तुम्हें सुनाऊँ एक कहानी!
मुझे न दादी यूँ बहकाओ,
पहले दूध-मलाई लाओ!
अम्माँ सच कहती दीदी को,
बातें आतीं बहुत बनानी!
गुड़धानी बंदर ने खाई,
बिल्ली खा गई दूध-मलाई!
अब चल तू भी चड्ढी खा ले,
मेरा भैया है सैलानी!

एक थी गुड्डी

चिट्ठी पढ़ी तुम्हारी गुड्डी,
उल्लू हिला रहा था ठुड्डी।
शैतानी से बाज न आता,
चपत लगा, बाहर भग जाता।

पापा जब दफ्तर से आते,
कुल्हड़ भर रसगुल्ले लाते।
कला दिखाता काला बंदर,
मैना है पिंजरे के अंदर।

भालू दादा आँख नचाते,
हाथी दादा सूँड हिलाते।
याद तुम्हारी सबको आती,
पूसी मौसी यह लिखवाती।

खूब लगन से करो पढ़ाई,
भिजवा दूँगी दूध-मलाई।
दादी तुमको भूल न पाती,
रोज कहानी मुझे सुनाती।

अगड़म-बगड़म, अंधा चोर,
काना धोबी, लँगड़ा मोर।
बड़े मजे की चार कहानी,
चारों मुझको याद जबानी।

छुट्टी होते ही घर आना,
मेरे लिए रिबन भी लाना।
मम्मी ने लड्डू बनवाए,
बड़े शैक से मैंने खाए!

मेरे ऐनक टूट गई थी,
सभी पढ़ाई छूट गई थी।
फिर कैसे मैं लैटर लिखती,
कोई चीज नहीं थी दिखती।

ऐनक फिर से नई बनाई,
शुरू हो गई बंद पढ़ाई।
लंबी बातें, छोटी चिट्ठी,
अच्छा गुड्डी, किट-किट किट्टी।

डबल नमस्ते फिर से लेना,
चिट्ठी पढ़ थोड़ा हँस देना!

अट्टू-बट्टू

एक था अट्टू, एक था बट्टू
एक था उनका घोड़ा,
अट्टू बैठा, बट्टू बैठा
तड़-तड़ मारा कोडा।
कोड़ा खाकर घोड़ा भागा
सँभल न पाया बट्टू,
गिरा जमीं पर, रोकर बोला-
घोड़ा बड़ा लिखट्टू!

छोटा अन्ने

छोटा अन्ने, मीठे गन्ने
बड़े मजे से खाता,
कोई उससे गन्ना माँगे
उसको जीभ चिढ़ाता!
मम्मी बोली-‘अन्ने बेटा,
मुझको दे दो गन्ने!’
‘ये कड़वे हैं, तुम मत खाओ!’
झट से बोला अन्ने।

बिल्ली बोली

दिल्ली में कितने दरवाजे?
दिल्ली में हैं कितने राजे?
कितनी लंबी है यह दिल्ली?
कहाँ गढ़ी दिल्ली की किल्ली?
दिल्ली कब से कहाँ गई?

कब टूटी, कब बनी नई?
दूध-मलाई खिलवाओ तो
सारे उत्तर अभी बताऊँ!
बिल्ली बोली म्याऊँ-म्याऊँ!

मैं बिल्ली मंत्री के घर की,
मुझे खबर है दुनिया भर की।
मैं घूमती सारा इंग्लैंड,
अमरीका में मेरे फ्रेंड।
कभी रूस भी हो आती हूँ,
नहीं किसी से शरमाती हूँ।
नीरू, आओ, जरा पास में,
तुमको बैले डांस दिखाऊँ!
बिल्ली बोली-म्याऊँ-म्याऊँ!

मैं बिल्ली हूँ अपटूडेट,
कभी न होती ऑफिस लेट।
लिखती पढ़ती, नाम कमाती,
एक राज की बात बताती।
संपादक से अपना मेल,
कभी न होती रचना फेल।
लाओ अपना फोटू दे दो,
इसी अंक में तुरंत छपाऊँ!
बिल्ली बोली-म्याऊँ-म्याऊँ!

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