Poetry

चंद्र कुमार जैन की रचनाएँ

 

एक दीप सूरज के आगे

लीक से हटकर अलग
चाहे हुआ अपराध मुझसे,
सच कहूँ, सूरज के आगे
दीप मैंने रख दिया है !

प्रश्नों के उत्तर नये देकर
उलझना जानता हूँ ,
और हर उत्तर में जलते
प्रश्न को पहचानता हूँ !
जाने क्यों संसार मेरे
प्रश्न पर कुछ मौन सा है ,
तोड़ने इस मौन का हर स्वाद
मैंने चख लिया है !

इंद्रधनुषी स्वप्न का बिखराव
मैंने खूब देखा,
रात का रुठा हुआ बर्ताव
मैंने खूब देखा !
पर सुबह की चाह मैंने
ताक पर रखना न जाना,
हर चुनौती को सफल जीवन का
स्वीकृत सच लिया है !

धूल से उठकर लकीरें
याद के जंगल में भटकीं,
और गले में चीख के वे
दर्द के मानिंद अटकीं !
पर मुझे जो आईना था
हर घड़ी निज – पथ सुझाता,
बस उसी के नाम यादों का
झरोखा कर दिया है !

स्वप्न मृत होते नहीं
यदि दीप हरदम दिपदिपायें,
धीरे – धीरे ही सही
जलती वो बाती मुस्कराये !
कोई माने या न माने
मान दे या तुच्छ बोले
जी सकूँ हर अंधेरे में
मैंने ऐसा हठ किया है !

सच कहूँ, सूरज के आगे
दीप मैंने रख दिया है !

पतझर का झरना देखो तुम

मधु-मादक रंगों ने बरबस,
इस तन का श्रृंगार किया है !
रंग उसी के हिस्से आया,
जिसने मन से प्यार किया है !

वासंती उल्लास को केवल,
फागुन का अनुराग न समझो !
ढोलक की हर थाप को केवल,
मधुऋतु की पदचाप न समझो !!
भीतर से जो खुला उसी ने,
जीवन का मनुहार किया है !
रंग उसी के हिस्से…

पतझर में देखो झरना तुम,
फिर वसंत का आना देखो !
पीड़ा में जीवन की क्रीड़ा,
आँसू में मुस्काना देखो !!
सुख-दुख में यदि भेद नहीं है,
समझो जीवन पूर्ण जिया है !
रंग उसी के हिस्से…

मुझे उनसे मिलना है

मूझे उनसे मिलना है
जो कम से कम यह जानते हैं
कि वे कुछ नहीं जानते !
मुझे उनसे मत मिलाना
जो अपनी जानकारी को ही
विज्ञान समझते हैं !

और मुझे मिलना है उनसे
जो अपना घर जलाकर
औरों की दुनिया रौशन करते हैं !
मुझे उनसे मत मिलाना
जो दूसरों के अंधेरे में
अपनी रोशनी आबाद करते हैं !

मुझे उनसे मिलना है
जो अपने घरों का कचरा
औरों पर नहीं फेंकते !
मुझे उनसे मत मिलाना
जो दूसरों का आंचल देख
खुद को बेदाग समझते हैं !

मुझे उनसे मिलना है
जो दूसरों की आग पर
अपनी रोटी नहीं सेंकते !
मुझे उनसे मत मिलाना
जो अपने चूल्हे के धुऍ से
दूसरों की दृष्टि छीनते हैं !

मुझे उनसे मिलना है
जो कुछ कहना
और कुछ करना भी जानते हैं !
मुझे उनसे मत मिलाना
जो बिना चले
बस सिर हिलाते हैं !

मुझे उनसे मिलना है
जो अपने होने पर
वि वास रखते हैं !
मुझे उनसे मत मिलाना
जो केवल कुछ बनने का
ख्वाब रखते हैं !

…और मुझे उनसे मिलना है
जो जीने के खातिर
सांसों का साथ देते हैं !
मुझे उनसे मत मिलाना
जो सिर्फ सांसों को
जीना समझ लेते हैं !

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