विनोदचंद्र पांडेय ‘विनोद’की रचनाएँ

मुन्ना! सो जा

सो जा, सो जा, मुन्ना सो जा।
आई पास रात की रानी
तुम्हें सुनाने मधुर कहानी,
परियां उतर रहीं धरती पर
सपनों की दुनिया में खो जा।
सो जा, सो जा, मुन्ना सो जा।
हंसते नभ में चंदा मामा
पहने चमचम जोड़ा जामा,
थपकी देते टिमटिम तारे
गला फाड़ मत रो, चुप हो जा।
सो जा, सो जा, मुन्ना सो जा।
सोए फूल मूंदकर आंखें
तितली नहीं खोलती पांखें,
चिड़ियों ने ले लिया बसेरा
तू भी भार नींद का ढो जा।
सो जा, सो जा, मुन्ना सो जा।

खूब रसीले जामुन

ये जामुन काले-काले हैं!
जब बादल जल बरसाते हैं,
ये पेड़ों पर पक जाते हैं,
भौंरों-सा रूप दिखाते हैं,
करते सबको मतवाले हैं!

होते सब खूब रसीले हैं
बैंगनी, लाल या नीले हैं
सब के सब रंग-रंगीले हैं,
सुंदर सुकुमार निराले हैं!

देखो, डालों पर लटके हैं,
गिरते जब लगते झटके हैं,
बच्चे खाते डट-डट के हैं,
बेचते इन्हें फलवाले हैं!

मानो रस में ही पगते हैं,
सबको ही अच्छे लगते हैं,
ले भी लो बिल्कुल सस्ते हैं,
सब पर जादू-सा डाले हैं!
ये जामुन काले-काले हैं!

चाट वाला 

आ गया, चाट वाला आया।
ले आया आलू की टिकिया
काबुली मटर बढ़िया-बढ़िया,
है लिए बताशे पानी के,
झट मुँह में पानी भर आया।

बेचता समोसे गरम-गरम,
रखे हैं खस्ते नरम-नरम,
पपड़ी है कितनी मजे़दार,
है स्वाद पकौड़ी का भाया।

प्यारे-प्यारे हैं दही-बड़े,
हैं सभी खा रहे खड़े-खड़े,
हैं छोले और भटूरे भी,
आ गया मजा जिसने खाया!

-साभार: आओ गाएं गीत, सं. श्यामसिंह ‘शशि’, 1996

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