श्रीप्रसाद की रचनाएँ

सुबह 

सूरज की किरणें आती हैं,
सारी कलियाँ खिल जाती हैं,
अंधकार सब खो जाता है,
सब जग सुन्दर हो जाता है

चिड़ियाँ गाती हैं मिलजुल कर,
बहते हैं उनके मीठे स्वर,
ठंडी-ठंडी हवा सुहानी,
चलती है जैसी मस्तानी

ये प्रातः की सुख बेला है,
धरती का सुख अलबेला है,
नई ताज़गी नई कहानी,
नया जोश पाते हैं प्राणी

खो देते हैं आलस सारा,
और काम लगता है प्यारा,
सुबह भली लगती है उनको,
मेहनत प्यारी लगती जिनको

मेहनत सबसे अच्छा गुण है
आलस बहुत बड़ा दुर्गुण है
अगर सुबह भी अलसा जाए
तो क्या जग सुन्दर हो पाए

दीवाली दीप

दीप जले दीवाली दीप हैं जले
नन्हें बच्चे प्रकाश के ये मचले

आँगन मुँडेर सजा द्वार सजा है
लहराती दीपक की ज्योति ध्वजा है
धरती पर जगर मगर तारे निकले
दीप जले दीवाली दीप हैं जले

दीप रखे हैं हमने ही धरती पर
ज्योति सदा सबको लगती है सुंदर
तीर चले अँधियारा स्वयं ही गले
दीप जले दीवाली दीप हैं जले

उत्सव है ज्योति का मनाते हैं हम
खुशियों गीत सदा गाते हैं हम
बच्चे दुनिया के आकाश के तले
दीप जले दीवाली दीप हैं जले

ऊपर भी तारे हैं नीचे भी तारे
फूलों की भांति खिले दीपक सारे
पेड़ों पर फल जैसे आज हैं फले
दीप जले दीवाली दीप हैं जले

मेहनत की ज्योति
अब जलाना हमको
धरती के कण-कण
सूरज सा चमको
हो जाएगा प्रकाश साँझ जो ढले
दीप जले दीवाली दीप हैं जले

हाथी चल्लम-चल्लम

हल्लम हल्लम हौदा, हाथी चल्लम चल्लम
हम बैठे हाथी पर, हाथी हल्लम हल्लम

लंबी लंबी सूँड़ फटाफट फट्टर फट्टर
लंबे लंबे दाँत खटाखट खट्टर खट्टर

भारी भारी मूँड़ मटकता झम्मम झम्मम
हल्लम हल्लम हौदा, हाथी चल्लम चल्लम

पर्वत जैसी देह थुलथुली थल्लल थल्लल
हालर हालर देह हिले जब हाथी चल्लल

खंभे जैसे पाँव धपाधप पड़ते धम्मम
हल्लम हल्लम हौदा, हाथी चल्लम चल्लम

हाथी जैसी नहीं सवारी अग्गड़ बग्गड़
पीलवान पुच्छन बैठा है बाँधे पग्गड़

बैठे बच्चे बीस सभी हम डग्गम डग्गम
हल्लम हल्लम हौदा, हाथी चल्लम चल्लम

दिनभर घूमेंगे हाथी पर हल्लर हल्लर
हाथी दादा जरा नाच दो थल्लर थल्लर

अरे नहीं हम गिर जाएँगे घम्मम घम्मम
हल्लम हल्लम हौदा, हाथी चल्लम चल्लम

बड़ा मजा आता

रसगुल्लों की खेती होती,
बड़ा मजा आता।
चीनी सारी रेती होती,
बड़ा मजा आता।

बाग लगे चमचम के होते,
बड़ा मजा आता।
शरबत के सब बहते सोते,
बड़ा मजा आता।

चरागाह हलवे का होता,
बड़ा मजा आता।
हर पर्वत बरफी का होता।
बड़ा मजा आता।

लड्डू की सब खानें होतीं,
बड़ा मजा आता।
दुनिया घर में पेड़े बोती,
बड़ा मजा आता।

मिलती रुपए किलो मिठाई,
बड़ा मजा आता।
रुपए होते पास अढ़ाई,
बड़ा मजा आता।

मुर्गे की शादी 

ढम-ढम, ढम-ढम ढोल बजाता
कूद-कूदकर बंदर,
छम-छम घुँघरू बाँध नाचता
भालू मस्त कलंदर!
कुहू-कुहू-कू कोयल गाती
मीठा मीठा गाना,
मुर्गे की शादी में है बस
दिन भर मौज उड़ाना!

बिल्ली का जुकाम

बिल्ली बोली-बड़ी जोर का-
मुझको हुआ जुकाम,
चूहे चाचा, चूरन दे दो
जल्दी हो आराम!
चूहा बोला-बतलाता हूँ
एक दवा बेजोड़,
अब आगे से चूहे खाना
बिल्कुल ही दो छोड़!

बड़ी बुआ

खाने को दो खीर कदम
खाने को दो मालपुआ,
खाने को देना पेड़े
माँग रही हैं बड़ी बुआ!
बड़ी बुआ ने खाया सब
बड़े पलँग पर बैठीं अब।
अब क्या लेंगी बड़ी बुआ,
शायद माँगेंगी हलुआ।

दही-बड़ा

सारे चूहों ने मिल-जुलकर
एक बनाया दही-बड़ा,
सत्तर किलो दही मँगाया
फिर छुड़वाया दही-बड़ा!
दिन भर रहा दही के अंदर
बहुत बड़ा वह दही-बड़ा,
फिर चूहों ने उसे उठाकर
दरवाजे से किया खड़ा।
रात और दिन दही बड़ा ही
अब सब चूहे खाते हैं,
मौज मनाते गाना गाते
कहीं न घर से जाते हैं!

सौ हाथी नाचें 

सौ हाथी यदि नाच दिखाएँ
यह हो कितना अच्छा,
नाच देखने को आएगा
तब तो बच्चा-बच्चा
धम्मक – धम्मक पाँव उठेंगे
सूँडें झम्मक – झम्मक
उछल – उछल हाथी नाचेंगे
छम्मक – छम्मक – छम्मक।
जो देखेगा हँसते-हँसते
पेट फूल जाएगा,
देख-देख करके सौ हाथी
बड़ा मज़ा आएगा।
ऐसा नाच कहीं भी जो हो
उसे देखने जाऊँ,
ढम्म-ढमाढम ढोल बजाऊँ
और गीत भी गाऊँ।
जब भी सौ हाथी आएँगे
होगा नाच तभी ये,
मगर देख पाऊँगा क्या मैं
सुंदर नाच कभी ये?

भारत अपना देश

भारत अपना देश, देश की माटी कितनी प्यारी
भारत बने महान, कामना रहती यही हमारी
भारत की थी शान, विश्व में सबने इसको माना
जब था देश महान, देश को सबने था पहचाना
बदला फिर इतिहास, दुखी फिर हुई धरा यह सारी
भारत अपना देश, देश की माटी कितनी प्यारी
सोने-चाँदी का भारत था, सचमुच ही धनवाला
पर्वत, नदियाँ, हरे खेत, वन, सब था यहाँ निराला
भारत अपना देश, देश की माटी कितनी प्यारी
रहे दबाते लोग देश को, फिर भी दबा न पाए
आखिर भारत के अपने दिन, पहले से फिर आए
जीत गई भारत की धरती, जो थी पहले हारी
भारत अपना देश, देश की माटी कितनी प्यारी
अब स्वतंत्र हैं हम, रहते हैं अपना सीना ताने
अब हम बढ़ते ही जाएँगे, ऐसा मन में ठाने
अपनी मेहनत से मेंटेंगे, हम सबकी लाचारी
भारत अपना देश, देश की माटी कितनी प्यारी
अपना खड़ा हिमालय हँसता, सूरज हँसता आता
तारे हँसकर रोज चमकते, चाँद हँसी बिखराता
कल-कल-कल लहरों में सागर, तान छेड़ता न्यारी
भारत अपना देश, देश की माटी कितनी प्यारी
भारत नाम याद आते ही, मन में खुशियाँ आतीं
चिड़ियाँ गातीं गीत, फूल खिलते, कलियाँ मुसकातीं
हवा झूमती, पेड़ नाचते, खुश हो बारी-बारी
भारत अपना देश, देश की माटी कितनी प्यारी

इंद्रधनुष 

बरस-बरस बादल बिखरा है
आसमान धुलकर निखरा है

किरणें खिल-खिल झाँक रही हैं
अपनी शोभा आँक रही हैं

धरती के छोरों तक मिलता
आसमान के ऊपर खिलता

रंग हरा, नारंगी, पीला
लाल, बैंगनी, नीला-नीला

आसमान का रंग मिला फिर
इंद्रधनुष सतरंग खिला फिर
बूँदें जब झरती हों झर-झर
किरणें उतर रही हों सर-सर

बूँदों से जब किरणें मिलतीं
इंद्रधनुष बन करके खिलतीं।

आग

दादी चिल्ला करके बोली
मुन्नू, जल्दी भाग
घर के पास बड़े छप्पर में
लगी जोर की आग

कोई पानी लेकर दौड़ा
कोई लेकर धूल
जलती बीड़ी फेंक फूस पर
किसने की यह भूल

छप्पर जला, जले दरवाजे
सब जल गया अनाज
तभी सुनी सबने घन-घन-घन
दमकल की आवाज

घंटे भर में दमकल ने आ
तुरत बुझाई आग
दमकल के ये वीर सिपाही
करते कितना त्याग

आक्सीजन और कार्बन
इनका जब हो मेल
गरमी और रोशनी देकर
आग दिखाती खेल

जाड़े में हम आग तापते
शीत न आती पास
आग बड़ी ताकत है लेकिन
करती बहुत विनाश

छुक-छुक चलती इससे रेलें
चलते हैं जलयान
चमकाती है सारे घर को
दीये की बन शान।

सुंदर बरसात

आई है सुंदर बरसात, जरा देखो तो
लगती है अब बिलकुल रात, जरा देखो तो
उमड़ घुमड़कर बादल आए हैं
आसमान में आकर छाए हैं
मेंढकों की ये बारात, जरा देखो तो
आई है सुंदर बरसात, जरा देखो तो
मोरों ने अपने पर फैलाकर
नाचना शुरू किया है गा-गाकर
रूमझूम थिरक रहे गात, जरा देखो तो
आई है सुंदर बरसात, जरा देखो तो
झींगुर की झनझन झनकार मधुर
मेंढक की मीठी लगती टर-टर
मुसकाते पेड़ों के पात, जरा देखो तो
आई है सुंदर बरसात, जरा देखो तो
घास में आई है जान, उग आई है
धरती पर सभी ओर, हरियाली छाई है
बरसा लाई है सौगात, जरा देखो तो
आई है सुंदर बरसात, जरा देखो तो
सूखी धरती ने जीवन पाया
जन-जन ने बरसा मंगल गाया
अच्छी है बरसा की बात, जरा देखो तो
आई है सुंदर बरसात, जरा देखो तो।

मेरा साथी घोड़ा

कोई खेले लेकर हाथी
और किसी का बंदर साथी
मेरा साथी घोड़ा
कभी न खाये कोड़ा
मेरा साथी घोड़ा
चल घोड़े, टिक-टिक-टिक चलता
जब चलता तब नहीं मचलता
पर चलता है थोड़ा
मेरा साथी घोड़ा
कभी न खाये कोड़ा
सबसे सुंदर यही सवारी
चढ़कर घूमो दुनिया सारी
जाएगा अलमोड़ा
मेरा साथी घोड़ा
कभी न खाये कोड़ा
छोटे कान, पैर, मुँह छोटा
दुबला नहीं, नहीं है मोटा
इसका कहीं न जोड़ा
मेरा साथी घोड़ा
कभी न खाये कोड़ा
भालू छोड़ा, सीटी छोड़ी
गुड़िया करती पी.टी. छोड़ी
मैंने सब कुछ छोड़ा
मेरा साथी घोड़ा
कभी न खाये कोड़ा।

सिर ताने सीना ताने

सिर, ताने, सीना ताने
हम चले वीर मस्ताने

हम चले हवा की गति से
हम चले एक ही मति से

गाते साहस के गाने
हम चले वीर मस्ताने

हम चले, सुबह जब आई
दुपहर ने भूमि तपाई

जब साँझ लगी मुसकाने
हम चले वीर मस्ताने

फिर रात भला क्यों रोके
तारे चमके खुश होके

पथ दिखलाया चंदा ने
हम चले वीर मस्ताने

बल है, साहस है भारी
देखेंगे, धरती सारी

मन में हैं ऐसा ठाने
हम चले वीर मस्ताने

चिड़ियाँ गाना गाती हैं
किरणें बिछ-बिछ जाती हैं

पथ बनते हैं पहचाने
हम चले वीर मस्ताने।

चेहरा 

चेहरा होता गोल किसी का
चेहरा होता लंबा-सा
और किसी का ऐसा होता
लगता बड़ा अचंभा-सा

चेहरा होता उठा-उठा-सा
दबा-दबा-सा होता है
चेहरा होता हँसता-हँसता
कोई जैसे रोता है
थोड़ा गोल और कुछ लंबा
चेहरा होता ऐसा भी
मुझको सब चेहरे भाते हैं
चेहरा हो वह जैसा भी
चेहरा होता बहुत बड़ा-सा
चेहरा होता छोटा भी
पतला भी चेहरा होता है
चेहरा होता मोटा भी
अपना-अपना चेहरा देखो
झाँको शीशे के अंदर
जरा बताओ ऐसा चेहरा
बोल उठे जो खिलखिलकर

कुछ चेहरे ऐसे हाते हैं
कर बैठेंगे बात अभी
कुछ शरारती चेहरे जैसे
करने को हैं घात अभी

जैसे कोई पुस्तक पढ़ता
चेहरे को भी पढ़ते हैं
कुछ चेहरे ऐसे होते हैं
जैसे हरदम लड़ते हैं

लेकिन क्या अपने चेहरे
कोई भी पढ़ पाया है
औरों का चेहरा ही पढ़कर
सबने अर्थ लगाया है।

मेरे मुरगे

मेरे मुरगे पानी पी
मेरे मुरगे खाना खा
मेरे मुरगे कुकुडूँ कूँ
उड़कर मुझसे दूर न जा

मेरे मुरगे के सिर पर
कलंगी है कितनी सुंदर
कितनी सुंदर पाँखें हैं
देखो तो इनको छूकर

मेरे मुरगे कुकुडूँ कूँ
कुकुडूँ-कुकुडूँ गीत सुना
मेरे मुरगे पानी पी
मेरे मुरगे खाना खा

मुरगा है यह बड़ा बली
सुंदर रंगरँगीला है
भूरी-भूरी पाँखें हैं
सिर पर बिलकुल पीला है

मेरे मुरगे ठुमुक-ठुमुक
अपना सुंदर नाच दिखा
मेरे मुरगे पानी पी
मेरे मुरगे खाना खा

साथ रहेंगे अब हम-तुम
साथ-साथ मैं खेलूँगा
तुम कुकुडूँ कूँ-कूँ करना
मैं गोदी में ले लूँगा

बैठा दूँगा तुझे वहाँ
जहाँ बड़ा गुड्डा रक्खा
मेरे मुरगे पानी पी
मेरे मुरगे खाना खा।

नन्ही सानो 

हँसकर बोली बैठ गोद में
मुझसे नन्ही सानो
बाबा, मेरी एक बात तुम
मानो या मत मानो

पर मैं सच कहती हूँ,
मैंने सपने में यह देखा
लड्डू लेकर आई मिलने
मुझसे दीदी रेखा

कुछ लड्डू दीदी ने खाये
कुछ मैंने भी खाये
तब तक बाबा, तुम अपनी
यह दाढ़ी लेकर आए

मैंने तुम्हें खिलाए लड्डू
गिन-गिनकर के ढेरों
तुमने खाये होंगे लड्डू
मीठे-मीठे सेरों

मैं सुनकर सानो की बातें
मन ही मन मुसकाया
सानो ने सपने का किस्सा
गढ़कर मुझे सुनाया

नन्ही सानो बड़ी चतुर है
गढ़ती तुरत कहानी
और सुनाती है फिर ऐसे
जैसे हो वह नानी।

कुट्टी-मिल्ली

लड़ते हो जी, तुम से कुट्टी
नहीं लड़ोगे, अच्छा मिल्ली
आओ, खेलें हम मिलजुलकर
हाथ मिलाओ, लिल्ली-लिल्ली

रूठ गए तुम, अच्छा कुट्टी
अरे, हँस रहे हो तुम, मिल्ली
आओ बैठो, बात बताएँ
नहीं उड़ाना मेरी खिल्ली

तो फिर झगड़े, लो फिर कुट्टी
माफी माँग रहे हो, मिल्ली
अच्छा आओ, खेल करें हम
तुम चूहा हो, मैं हूँ बिल्ली

बुरा लगा चूहे पर, कुट्टी
लो, मैं ही चूहा हूँ, मिल्ली
पर तुम बिल्ली हो तो बोलो
क्या तुमने देखी है दिल्ली

यह भी बुरी बात है, कुट्टी
खेलो खेल दूसरा, मिल्ली
जैसे खेल खेलते घर में
अपने दोनों पिल्ला-पिल्ली

तो अब कभी न होगी कुट्टी
सदा रहेगी मिल्ली-मिल्ली
हम दोनों हैं प्यारे साथी
आपस में है हिल्ली-मिल्ली।

मैं हूँ जोकर 

बोली हँसकर, मत यों रोकर
मैं हूँ जोकर
चुहिया लाओ बिल्ली आई है
मुँह धोकर
लेकिन तुम तो दस बजे उठे हो
अब सोकर
अब शाला जाओ तीन-तीन
घंटे खोकर
बोलो हँसकर, मत यों रोकर
मैं हूँ जोकर

गदहे ने अपना गाना गाया
खुश होकर
तो कोयल बोली, बुद्धि कहाँ
रक्खी ढोकर
मर गया शेर, खाकर के
बकरे की ठोकर

बोलो हँसकर, मत यों रोकर
मैं हूँ जोकर।

घोंसला बनाया

चिड़िया ने घोंसला बनाया
मेहनत की भारी
एक-एक कर तिनके लाई
चिड़िया बेचारी

सुंदर छोटा द्वार बनाया
गर्मी थी भीतर
वह घोंसला नहीं, चिड़िया का
था सुंदर-सा घर

चिड़ा और चिड़िया दोनों ने
मिलजुल मेहनत की
लेकिन दोनों में मेहनत थी
ज्यादा चिड़िया की

अंडे देने थे उसको ही
अंडे प्यारे से
अंडों से बच्चे आने थे
बड़े दुलारे से

कुछ दिन बाद आ गये अंडे
कोमल गोले से
बड़े नहीं थे और न छोटे
सिर्फ मझोले से

उनमें से दो बच्चे आये
छोटे छुईमुई
आँखें खुली थीं उनकी
करते कुईं-कुईं

चिड़िया उनको चुग्गा लाती
और खिलाती थी
बार-बार बाहर जाती थी
जल्दी आती थी

बच्चों ने आँखें भी खोलीं
पाँखें भी खोलीं
दोनों बच्चे मित्र बन गये
दोनों हमजोली

लगे बोलने चीं चीं चीं चीं
फिर बाहर आये
चिड़िया ने रहने, उड़ने के
सब गुण सिखलाये

जब बच्चों को उड़ना आया
चले गये उड़कर
छोड़ गई चिड़िया भी अपना
बना बनाया घर

यह चिड़िया ऐसा ही फिर
घोंसला बनायेगी
अंडे देगी, बच्चे पाकर
खुश हो जायेगी।

बिल्लू का ब्याह

चूहे बनकर चले बराती
बिल्लू का है ब्याह जी
मुकुट पहनकर बिल्लू चलते
वाह-वाह जी, वाह जी

ढोल ढमाढम, ढमढम बजता
बिल्लू नाचे नाच जी
पाँव थिरकते सब चूहों के
है यह बिलकुल साँच जी

धीरे-धीरे द्वार आ गया
आई जहाँ बरात जी
आतिशबाजी लगी छूटने
थी तब आधी रात जी

ठाटबाट से ब्याह हो गया
पाए अच्छे माल जी
दुलहिन तो इतनी अच्छी थी
मत पूछो कुछ हाल जी

बिल्ली के घर से जो पाया
लेकर चली बरात जी
आने-जाने और ब्याह में
बीत गए दिन सात जी

खुशी सभी को हुई ब्याह में
पाया अच्छा मान जी
लड्डू पेडे़ खूब उड़ाये
बनकर के मेहमान जी।

आ री कोयल

आ री कोयल, गा री कोयल
मीठे गाने गा
मेरी इस नन्ही बगिया में
शाम-सुबह तू आ

पक्षी आते, शोर मचाते
बगिया भर जाती
सूरज मुसकाता पेड़ों पर
किरण-किरण आती

फूलों वाली, बड़ी निराली
बगिया है सुंदर
दिनभर हवा चला करती है
गम-गम, मधुर-मधुर

तू आएगी, तू गाएगी
सुन करके गाना
खिल-खिल-खिल हँस देगी बगिया
कोयल, तू आना।

दुनिया को चमकाये चाँद

सागर में लहराए चाँद
तालों पर मुसकाये चाँद
नदिया की कलकल धारा में
झलमल रूप दिखाये चाँद

सूरज डूबे, आये चाँद
और रोशनी लाए चाँद
बाग-बाग में, फूल-फूल पर
खिल-खिलकर बिछ जाए चाँद

पेड़ों पर झुक आए चाँद
पत्तों पर शरमाए चाँद
छत पर छिटक-छिटककर फैले
आँगन में भर जाए चाँद

मुझको रोज बुलाए चाँद
लेकिन पास न आए चाँद
खिड़की से घुसकर कमरे में
खिल-खिल-खिल आ जाए चाँद

आसमान में आये चाँद
धरती खूब हँसाए चाँद
चम-चम-चम रोशनी बिछाकर
दुनिया को चमकाए चाँद।

गुड़िया 

इधर-उधर से खेल-खालकर
गुड़िया रानी आई है
जाने क्या अपने हाथों में
गीला-गीला लाई है

शायद सनी हुई माटी है
पड़ी हुई थी आँगन में
जाकर अभी वहीं खेली थी
और वहीं से आई है

अरे हुए कपड़े भी मैले
उस माटी से ही तो सब
मुँह में भी कुछ उठा-उठाकर
इसने माटी खाई है

बहुत मचाती है यह ऊधम
इधर-उधर झट जाती है
फिर चाहे जितना चिल्लाओ
देता किसे सुनाई है

अब मैं सब कपड़े धोऊँगी
साफ करूँगी मुँह को भी
हाथ-पैर भी धोने होंगे
कैसी शकल बनाई है

जब देखो, खेला करती है
घर के बाहर या घर में
मेरी प्यारी यह गुड़िया है
खिल-खिल हँसती आई है।

अगर सुबह भी

सूरज की किरणें आती हैं
सुंदर कलियाँ खिल जाती हैं
अंधकार सब खो जाता है
सब जग सुंदर हो जाता है

चिड़ियाँ गाती हैं मिल-जुलकर
बहते हैं उनके मीठे स्वर
ठंडी-ठंडी हवा सुहानी
चलती है जैसे मस्तानी

यह प्रातः की सुख-बेला है
धरती का सुख अलबेला है
नई ताजगी, नई कहानी
नया जोश पाते हैं प्राणी

खो देते हैं आलस सारा
और काम लगता है प्यारा
सुबह भली लगती है उनको
मेहनत प्यारी लगती जिनको

मेहनत सबसे अच्छा गुण है
आलस बहुत बड़ा दुर्गुण है
अगर सुबह भी अलसा जाए
तो क्या जग सुंदर हो पाए।

चिड़िया और शिकारी

एक पेड़ पर छिपकर आया
चिड़िया सुंदर तीर चलाया
बैठी खुशदिल चिड़िया प्यारी
सबसे हिलमिल वह बेचारी
गाना गाती नीचे आई
मन बहलाती और चिल्लाई
चींचीं चूँचूँ चींचीं चूँचूँ
चींचीं चूँचूँ चींचीं चूँचूँ
गाना गाती मरी बेचारी
रस बरसाती चिड़िया प्यारी
तभी शिकारी गाना गाती
अत्याचारी मन बहलाती
अब बगिया में मीठे-मीठे
कौन गीत गाएगा
कोई भी पक्षी डरकर
अब
यहाँ नहीं आएगा
बाग लगेगा कितना सूना
होगा यहाँ न गाना
चिड़िया गई और मीठे
गीतों का गया खजाना।

तिरंगा

छूता है आकाश तिरंगा
बादल के है पास तिरंगा
भारत की है आस तिरंगा

भारत के ऊपर छाया है
दूर हवा में लहराया है
सूरज ने आ चमकाया है

हम गाते हैं इसका गाना
‘जन-गण-मन’ है गीत सुहाना
इस झंडे के नीचे आना

जब गुलाम था भारत प्यारा
तब झंडा था यही सहारा
इस झंडे से दुश्मन हारा

हमने इसका गाना गाया
सारा देश उमड़कर आया
उस दिन था दुश्मन थर्राया

कितनों ने ही की कुर्बानी
उनकी है यह ध्वजा निशानी
वे थे सब स्वदेश अभिमानी

हम सबसे है बड़ा तिरंगा
अडिग भाव से खड़ा तिरंगा
सबके मन में चढ़ा तिरंगा।.

रामनगर से नानी आईं

रा रा रा रा रा रा!
रामनगर से नानी आईं
लाईं बिल्ली कानी
लेकिन वह थी बड़ी पुरानी
पक्की चूहेखानी
सुबह चार चूहे खाती थी
फिर जपती थी माला
चुहियाँ रखती अलमारी में
जड़ जाती थी ताला

रा रा रा रा रा रा!
बलबल बलबल ऊँट बोलता
गदहा गाता गाना
बार-बार कोयल कहती,
जी फिर से जरा सुनाना
ऊँट समझकर चुपा गया, पर
गदहा समझ न पाया
हेंचू हेंचू हेंचू हेंचू भारी शोर मचाया
रा रा रा रा रा रा रा!

मुरगा बोला ठीक समय पर
मगर न मुरगा जागा
बोला, सूरज अभी न निकला
तब फिर बोला कागा
बिस्तर में से आँखें खोलीं
देखा, बादल छाया
टन टन टन दीवाल घड़ी ने
बारह तभी बजाया
रा रा रा रा रा रा रा!

मैं खाता हूँ चार चपाती
कहने लगे कन्हाई
मैं दो खाकर उठ जाता हूँ
बोले उनके भाई
पर जब दोनों खाने बैठे
बिगड़ गया हलवाई
आठ किलो आटे की पूड़ी
इन दोनों ने खाई
रा रा रा रा रा रा रा!

दुनिया में कितने अचरज हैं
हाथी कितना भारी
शुतुरमुर्ग कहता, गर्दन में
मेरी शोभा सारी
पेड़ बड़ा होता इमली का
फल होता है छोटा
मेरे दादा से दूना है
उनका भारी सोटा।

लोरी

मेरा गोद खिलौना रे
सोया मेरा छौना रे!

झूला झूले सोने का
झूले रेशम की डोरी
मीठे सपनों में खोया
सुन-सुन परियों की लोरी।

मेरा डीठ डिठौना रे
सोया मेरा छौना रे!

चाँद, सितारे जाग रहे
नाच रही है चाँदनिया,
फूल खिले हैं चाँदी के
फूली मेरी आँगनिया।

मेरा सुख अनहोना रे
सोया मेरा छौना रे!

गीत सुनाऊँ, सोये तू
तू सोये औ गाऊँ मैं,
जागे, खेले, रूठे तू
हँस-हँस तुझे मनाऊँ मैं।

मेरा लाल सलौना रे
सोया मेरा छौना रे!

धम्मक धम्मक धम 

चल रे घोड़े, चल अलमोड़े
तुझ पर बैठे हम
धम्मक धम्मक धम

सौ लड्डू ले, बमबम बोले
खीर न देना कम
धम्मक धम्मक धम

कहते चाचा, दिखा तमाचा
करो नहीं ऊधम
धम्मक धम्मक धम

लेकर बिल्ली, जाता दिल्ली
चूहा चढ़ टमटम
धम्मक धम्मक धम

नाचे बंदर, घर के अंदर
ढोल बजा ढमढम
धम्मक धम्मक धम

उछल-उछलकर मेंढक टर-टर
कहता-बादल थम
धम्मक धम्मक धम

शेर गरजता, गधा न डरता
चरता घास नरम
धम्मक धम्मक धम।

ताकधिना

गोल बनाकर आओ नाचें
झूमें गायें-ताकधिना,
दोनों हाथों को फैलाकर
हाथ मिलायें-ताकधिना!

ओहोहो, हम सब कितने हैं
सब आ जाएँ-ताकधिना,
ताली दे-देकर के नाचें
मिलकर गायें-ताकधिना!

एक साथ ही पाँव उठेंगे
नीचे, ऊपर-ताकधिना,
एक साथ गोला घूमेगा
चक्कर खाकर-ताकधिना!

ताली देते, हाथ मिलाते
पाँव चलाते-ताकधिना,
एक बड़े घेरे में हम सब
आते, जाते-ताकधिना!

कितना नाचे, कितना गाया
धूम मचाई-ताकधिना,
कल फिर सब नाचें, गायेंगे
आना भाई-ताकधिना!

एक सपना 

आज रात में सपना देखा
अद्भुत एक तमाशा
गाड़ी लेकर चला ड्राइवर
खाते हुए बताशा

भूल गया वह अटरी-पटरी
वह सिग्नल भी भूला
पार कर गया प्लेटफार्म सब
तब उसका दम फूला

फिर भी रुकी न गाड़ी उसकी
एक गाँव से आई
घर तोड़े, छप्पर उजाड़कर
खंभों से टकराई

छप्पर पर बंदर बैठे थे
वे इंजन में आए
इधर-उधर कुछ पुरजे खींचे
ठोके और हिलाए

बस, इंजन रुक गया वहीं पर
और रुक गई गाड़ी
मेरा रुका मेरा सपना भी
गाड़ी बनी पहाड़ी।

अगर 

अगर नहीं यह सूरज होता
तो होता अँधियारा
अगर न आता चाँद, न लगता
आसमान यह प्यारा

अगर नहीं ये तारे होते
चमकीले-चमकीले
आसमान में कहाँ चमकते
झिलमिल नीले-पीले

और अगर ये रंगबिरंगे
फूल न खिलते होते
तो क्या होता, हम फूलों की
यह सुंदरता खोते

बेलें होतीं नहीं, न होते
पेड़ झूमने वाले
पर्वत होते नहीं कहीं
आकाश चूमने वाले

नदियाँ, ताल और झरना भी
नहीं एक भी होता
निर्मल पानी का पत्थर से
कहीं न बहता सोता

अगर नहीं होते इतने पशु
पक्षी कहीं न गाते
तो हम कैसे इस दुनिया में
अपना मन बहलाते

इस दुनिया में सब-कुछ ही है
लगती इससे प्यारी
कौन देख पाता वरना ये
सुंदर दुनिया सारी।

एक परी है 

एक परी है नीली-नीली
एक परी है हरी-हरी
एक परी है पीली, जिसकी
फूलों से है फ्राक भरी

तीनों परियाँ गाना गातीं
नाच दिखातीं छम-छम-छम
आओ, आओ, इन तीनों
सुंदर परियों को देखें हम

गुड़िया एक नई नीली है
और एक है हरी-हरी
और एक गुड़िया पीली है
माँगें हैं सिंदूर भरी

तीनों गुड़ियाँ बातें करतीं
कहतीं रोज कहानी हैं
तीनों गुड़ियों की भोलीभाली
सी एक बूढ़ी नानी हैं

तीनों परियाँ तीनों गुड़ियाँ
छह सहेलियाँ छोटी-सी
एक सहेली बिलकुल नन्ही
एक सहेली मोटी-सी

खेल रही हैं मिलजुल करके
हँसती हैं ये सब हरदम
प्यारी-प्यारी बड़ी दुलारी
नन्ही खाती है चमचम।

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